मेडिकल कॉलेज घोटाला मामला: प्रशांत भूषण ने CJI दीपक मिश्रा पर लगाए कई गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों को भेजी शिकायत

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सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ ‘मेडिकल कॉलेज घोटाला’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों को लिखित में शिकायत भेजी है। भूषण ने जिन न्यायाधीशों को यह शिकायत भेजी गई है, उनमें वे चार जज भी शामिल हैं, जिन्होंने 12 जनवरी को प्रेस वार्ता की थी। प्रशांत भूषण ने इस संबंध में मंगलवार (16 जनवरी) को संवाददाताओं को बताया कि शिकायत में प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा पर चार मुख्य आरोप हैं।

Photo: APN LIVE

उन्होंने कहा कि जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस गोगोई, जस्टिस जोसेफ, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस एके सीकरी को लिखित शिकायत दी गई है। न्यूज 18 के मुताबिक, प्रशांत भूषण ने कहा कि कुछ लोग मेडिकल कॉलेज घोटाले में सीबीआई के राडार पर थे और इन लोगो की कॉल सीबीआई इंटरसेप्ट भी कर रही थी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में सीबीआई को पता चला कि आरोपियों के बीच जजों को पैसे देने की बात भी हो रही थी।

प्रशांत भूषण के मुताबिक इस मामले में सीबीआई एक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पैसों का लेनदेन करते हुए रंगे हाथ पकड़ना चाहती थी। लेकिन सीजेआई मिश्रा ने सीबीआई को इसकी इजाजत नहीं दी। उन्होंने बताया कि सीजेआई की इजाजत के बिना किसी भी हाईकोर्ट के जस्टिस के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की जा सकती है। उन्होंने बताया कि बाद में पूर्व जज आईएम कुद्दुसी और कुछ बिचौलियों को पकड़ा गया था।

न्यूज 18 के मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पर आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज घोटाले में आरोप लगने के बाद भी वह प्रसाद एजुकेशन का पक्ष लेते नजर आए। इस केस में अपने एडमिनिस्ट्रेटिव पावर का इस्तेमाल करते हुए मामले की सुनवाई के लिए 3 जूनियर जजो को शामिल किया। उन्होंने कहा कि इस केस के संबंध में 6 नवंबर 2017 को सीजेआई की बेंच ने एक आदेश दिया जो कि गलत था।

CJI पर लगाया गंभीर आरोप

प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि वकील रहते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने एक जमीन ली थी, जिसमें उन्होंने गलत शपथपत्र दिया था। साल 1985 में ADM ने जमीन के अलॉटमेंट को रद्द कर दिया था, लेकिन दीपक मिश्रा ने 2012 में जमीन को खाली किया। प्रशांत भूषण ने मांग की है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के तीन सीटिंग जजों की एक कमिटी बने जो इस गंभीर शिकायत पर ध्यान दे, क्योंकि मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, ऐसे में कमिटी को इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि सरकार की तरफ से ब्लैकमेलिंग न हो।

प्रशांत भूषण ने पांचों जजों से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में जांच करें। कैंपेन फॉर जुडिशियल अकाउंटबिलिटी एंड रिफॉर्म्स के संयोजक के रूप में प्रशांत ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ अंदरूनी जांच की मांग की है और कहा है कि सीजेआई ने स्पष्ट तौर पर गंभीर कदाचार के कई कार्य किए हैं, जिनकी जांच इस न्यायालय के तीन/पांच न्यायाधीशों की एक समिति द्वारा की जानी चाहिए।

आज तक के मुताबिक, प्रशांत भूषण ने अपनी शिकायत में ओडिशा उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज आईएम कुद्दुसी, बिचौलिए विश्वनाथ अग्रवाल और प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के बीपी यादव के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया है, जिसे टैप किया गया था। कुद्दुसी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, और फिलहाल वह जमानत पर हैं।

प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट को भारतीय चिकित्सा परिषद ने मेडिकल के छात्रों का प्रवेश लेने से रोक दिया था, और उसके बाद संस्थान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। प्रशांत भूषण ने प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज नारायण शुक्ला के खिलाफ मामला दर्ज करने की सीबीआई को अनुमति न देने के CJI दीपक मिश्रा के कदम पर भी अपनी शिकायत में सवाल उठाया है।

प्रशांत भूषण ने 24 पेज की अपनी शिकायत में कहा है कि, “उपरोक्त दर्ज मामलों ने न्यायालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और न्यायपालिका को बदनाम किया है। यह एक ऐसा मामला है, जिसे तत्काल देखने की जरूरत है।” उन्होंने शिकायत में कहा है कि, “जांच तेजी के साथ होनी चाहिए, ताकि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को और नुकसान न पहुंचे और इसकी ईमानदारी व स्वतंत्रता बरकरार रहे।

 

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