सीबीआई प्रमुख राकेश अस्थाना की नियुक्ति पर प्रशांत भूषण की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

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सीबीआई प्रमुख राकेश अस्थाना की नियुक्ति पर प्रशांत भूषण की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए चुनौती पेश की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अंतरिम निदेशक राकेश अस्थाना की नियुक्ति रद्द करने तथा सीबीआई के नियमित निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया नियमानुसार शुरू करने का केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गए हैं।

प्रशांत भूषण

गैर सरकारी संस्था, कॉमन कॉज ने एक जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में तर्क दिया है कि केंद्र सरकार ने अस्थाना को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाने के लिए दुर्भावनापूर्ण, मनमाने ढंग से तथा अवैध तरीके से कार्रवाई की। केन्द्र सरकार ने जानूझकर गुजरात कैडर के अफसर की नियुक्ति की है जबकि जिस अफसर की नियुक्ति होनी थी उसे दो दिन पहले ही किसी दूसरे पद पर ट्रांसफर कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि अस्थाना ने गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना की जांच करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) का नेतृत्व किया और वह गुजरात पुलिस में कई अहम पदों पर रह चुके हैं। राकेश अस्थाना को सीबीआई निदेशक का कार्यभार सौंपने के लिए केंद्र सरकार ने दुर्भावनापूर्ण, मनमाने व अवैध तरीके से कई कदम उठाए।

मोदी सरकार ने गुजरात काडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को CBI निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जबकि सरकार ने अभी जांच ब्यूरो के लिए पूर्ण कालिक प्रमुख की घोषणा नहीं की है। गुजरात काडर के 1984 बैच के अधिकारी अस्थाना सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक के रूप में प्रोन्नत किया गया था।

इससे पहले, विशेष निदेशक आर के दत्ता, जो जांच ब्यूरो के प्रमुख के पद की दौड़ में थे, को विशेष सचिव के तौर पर गृह मंत्रालय भेज दिया गया था। गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है।

निवर्तमान निदेशक अनिल सिन्हा के दो दिसंबर, 2016 को सेवानिवृत्ति से मात्र दो दिन पहले विशेष निदेशक आर.के.दत्ता को केंद्रीय गृह मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया। उनके लिए मंत्रालय में विशेष सचिव के एक नए पद का सृजन किया गया। उनकी नियुक्ति दो पद ऊपर संयुक्त सचिव के रूप में की गई है।

याचिका में कहा गया है कि ऐसा केवल इसलिए किया गया, ताकि दत्ता सीबीआई निदेशक की दावेदारी न पेश करें, क्योंकि सिन्हा के बाद एजेंसी में पद के हिसाब से वह दूसरे नंबर पर थे।

 

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