प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को बताया छोटा झटका, कहा और भी सबूत है

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शुक्रवार को सहारा रिश्वत मामले में न्यायालय की टिप्पणी के बाद मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने आरोपों को पुनः परिभाषित करते हुए कहा कि ये एक छोटा झटका है, इसके अलावा अन्य सबूत भी है। न्यायालय की टिप्पणी के बाद ये थोड़ा सेटबेक है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जो कायदे सुप्रीम कोर्ट ने जैन हवाला केस में परिभाषित किए थे कि अगर किसी औद्योगिक घराने के छापे में ऐसी कोई डायरी या कागज़ मिलते है या दस्तावेज प्राप्त होते है जिसमें कि ये दिखया गया हो कि कई जन अधिकारियों को उन्होंने पैसे दिए है तो उसकी जांच होना जरूरी है। क्योंकि वो एक सबूत है कि पैसे दिए गए हैं।

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जनता का रिर्पोटर से बातचीत करते हुए उन्होंने कहां कि आज अगर सुप्रीम कोर्ट ये पुछता है कि ये तुम कैसे कह सकते हो कि दस्तावेज़ों में जो लिखा है वो सही है या नहीं तो ये जांच के बाद ही पता लगेगा। क्योंकि बिरला के जो दस्तावेज मिले है उसमें इनकम टैक्स अधिकारियों ने उनसे पुछताछ भी की थी। जिसमें उन्होंने माना कि हमारे पास हवाला के करोड़ो रूपये आते थे।

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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा, बिड़ला समूह पर हुई छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर पीएम मोदी पर लगे रिश्वत के अरोपो पर दाखिल याचिका पर सुनवाई का आदेश जारी किया था लेकिन सबूतों को अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि प्रस्तुत सामग्री ऐसा आदेश देने के लिए पर्याप्त नहीं है। किसी दस्तावेज में किसी बड़े व्यक्ति का नाम आ जाने भर से जांच के आदेश नहीं दिये जा सकते।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्था कामनकाज को मांग के समर्थन में कोई और ठोस सबूत पेश करने के लिए 14 दिसंबर तक का समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर वे कोई और ठोस सबूत लाते हैं तो कोर्ट जरूर आदेश देगा लेकिन इस सामग्री पर नहीं। इसी के चलते प्रख्यात सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने शुक्रवार को सहारा रिश्वत मामले में न्यायालय की टिप्पणी के बाद आरोपों को नये तरह से परिभाषित किया है।

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आपको बता दे कि आपको बता दे कि जांच में मिले दस्तावेज़ों की प्रविष्टियों में करोड़ो रुपए के भुगतान ‘गुजरात के मुख्यमंत्री’ और ‘मोदी जी,’ ‘मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री,’ ‘छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री’ और ‘शायना एनसी जी’ के नाम मुख्य तौर पर दिखाई दे रहें है। इस मूल्याकंन रिर्पोट के अनुसार, आदित्य बिड़ला ग्रुप ने मोदी को 25 करोड़ रूपये रिश्वत के रूप में भुगतान किया था।

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बिरला के दस्तावेज़ों में मुख्यमंत्री के आगे कोष्ठक में दिए गए पुष्टी की थी और लिखा था कि ’12 दे दिया गया है और बाकी?’ उस समय नरेन्द्र मोदी 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे। दस्तावेज आयकर अधिकारियों द्वारा कि गई छापेमारी जो क्रमशः 2013 और 2014 में आदित्य बिड़ला ग्रुप व सहारा समूह के कार्यालयों पर की गई थी। ये उन्हीं के मूल्याकंन की रिर्पोट थी। जनता का रिर्पोटर द्वारा इन दस्तावेज़ों के बरामद होने के बाद इसका खुलासा किया गया था।

रिर्पोट के पेज 89 में उल्लेख है कि कम से कम आठ भुगतान अहमदाबाद में सहारा कर्मचारी ‘जायसवाल जी’ के माध्यम से ‘मोदी जी’ को हुए। ये भुगतान कुल 40.10 करोड़ रूपये का था जो जायसवाल जी द्वारा ‘मोदी जी’ को 30 अक्टूबर 2013 से 21 फरवरी 2014 के बीच हुआ। उस समय मोदी बीजेपी से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और लोकसभा के लिए अपना चुनावी अभियान शुरू कर चुके थे। उसी पृष्ठ पर अन्य प्रविष्ठियों से ज्ञात होता है कि कुछ और महत्वपूर्ण भुगतानों में एमपी के मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री दिल्ली का नाम था।

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री’ को 10 करोड़ का भुगतान दो किश्तों में भुगतान ‘नीरज वशिष्ठ’ के द्वारा किया गया था और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को 4 करोड़ का भुगतान नंदी जी द्वारा किया गया था। ‘दिल्ली की मुख्यमंत्री’ ने जायसवाल से एक करोड़ रुपया प्राप्त किया जायसवाल वो ही है जिसने 23 सितंबर, 2013 को ‘मोदी’ को 40.1 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। रिपोर्ट के पेज नंबर, 90 पर, इसी तरह के भुगतान की एक सूची है , लेकिन इस सूची में ‘मोदी’ को ‘गुजरात के मुख्यमंत्री’ के रुप में कहा गया हैं। जबकि भुगतान करने वाले का नाम ‘जायसवाल जी’ ही रहा है।

पेज नंबर 91 पर, अन्य नामों के साथ ‘शायना एनसी जी,’ का भी नाम है जिन्हे भुगतान उदय जी के माध्यम से किया गया था, ‘शायना एनसी जी’ को 4 करोड़ का भुगतान किया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, ‘शायना एनसी जी’ को 4 करोड़ रुपये चार किश्तों में 28 अगस्त 2013 और 20 जनवरी 2014 के बीच किया गया था।

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