अपनी किताब में प्रणब मुखर्जी ने 2014 में कांग्रेस की हार के लिए सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को ठहराया जिम्मेदार

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भारत के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रणब मुखर्जी के संस्मरण से कई नई बातें निकल कर सामने आ रही है। प्रणब मुखर्जी ने इसमें लिखा है कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस राजनीतिक दिशा से भटक गई।

प्रणब मुखर्जी

मुखर्जी अपने निधन से पहले संस्मरण ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ को लिख चुके थे। रूपा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक जनवरी, 2021 से पाठकों के लिए उपलब्ध होगी। उनका कोरोना वायरस संक्रमण के बाद हुई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के करण गत 31 जुलाई को 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। गौरतलब है कि, पुस्तक में कांग्रेस के संदर्भ में उनकी टिप्पणी ऐसे समय में सामने आ रही है जब कांग्रेस आंतरिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। प्रणब मुखर्जी के संस्मरणों की अंतिम मात्रा इस मुद्दे को लेकर और अधिक बहस छेड़ सकती है।

इस किताब में मुखर्जी लिखते हैं, “कुछ पार्टी सदस्यों का यह मानना था कि अगर 2004 में वह प्रधानमंत्री बनते तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस करारी हार वाली स्थिति में नहीं आती। हालांकि, इस राय से मैं इत्तेफाक नहीं रखता। मैं यह मानता हूं कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी नेतृत्व ने राजनीतिक दिशा खो दी। सोनिया गांधी पार्टी के मामलों को संभालने में असमर्थ थीं, तो डॉ मनमोहन सिंह की सदन से लंबी अनुपस्थिति से सांसदों के साथ किसी भी व्यक्तिगत संपर्क पर विराम लग गया।”

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘मेरा मानना है कि शासन करने का नैतिक अधिकार प्रधानमंत्री के साथ निहित होता है। देश की संपूर्ण शासन व्यवस्था प्रधानमंत्री और उनके प्रशासन के कामकाज का प्रतिबिंब होती है। डॉक्टर सिंह गठबंधन को बचाने में व्यस्त रहे जिसका शासन पर असर हुआ, जबकि नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल में शासन की अधिनायकवादी शैली को अपनाए हुए प्रतीत हुए जो सरकार, विधायिका और न्यायपालिका के बीच तल्ख रिश्तों के जरिए दिखाई दी।’

जनवरी में रिलीज़ होने वाली किताब में प्रणब मुखर्जी विश्लेषण करते हैं कि 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह पराजित क्यों हुई। प्रणब मुखर्जी 2012 में राष्ट्रपति बनने तक लगभग हर कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे। डॉ मुखर्जी अपनी इस किताब में उन दो प्रधानमंत्रियों की तुलना भी करते हैं जिनके साथ उन्होंने काम किया, एक डॉ मनमोहन सिंह और उनके बाद आए नरेंद्र मोदी।

पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी पुस्तक में लिखा, ‘मेरा मानना है कि शासन करने का नैतिक अधिकार पीएम के साथ निहित है। राष्ट्र की समग्र स्थिति पीएम और उनके प्रशासन के कामकाज को प्रतिबिंबित करता है। जबकि डॉ सिंह को गठबंधन को बचाने की सलाह दी गई थी, जो कि शासन पर भारी पड़ा, लगता है कि मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान शासन की एक निरंकुश शैली को नियोजित किया है, जैसा कि सरकार, विधायिका और न्यायपालिका के कड़वे संबंधों द्वारा देखा जाता है। केवल समय ही बताएगा कि इस सरकार के दूसरे कार्यकाल में ऐसे मामलों पर बेहतर समझ है या नहीं।’

इस पुस्तक में पश्चिम बंगाल के एक गांव में बिताए बचपन से लेकर राष्ट्रपति रहने तक उनके लंबे सफर पर रोशनी डाली गई है। रूपा प्रकाशन ने शुक्रवार को ऐलान किया कि मुखर्जी के संस्मरण ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ को जनवरी, 2021 में वैश्विक स्तर पर जारी किया जाएगा।

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