प्रणब मुखर्जी ने RSS के मंच से पढ़ाया राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति का पाठ, कांग्रेस ने ली राहत की सांस, बोली- पूर्व राष्ट्रपति ने संघ को दिखाया ‘सच का आईना’

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तमाम कांग्रेस नेताओं की नाराजगी के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार (7 जून) को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पहुंचे। यहां आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुलदस्‍ता भेंटकर पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी का स्‍वागत किया। जिसके बाद मुखर्जी ने आरएसएस के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम को संबोधित किया। पूर्व राष्ट्रपति के नागपुर में संघ के मुख्यालय में जाने और वहां पर संघ के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को भाषण देने के फैसले पर हर जगह चर्चा हो रही है। उनके भाषण का हर कोई अपने-अपने हिसाब से मायने निकाल रहा है।

(PTI Photo)

इससे पहले पूरी कांग्रेस असहज नजर आ रही थी। यहां तक कि उनकी बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उनका (डॉ.मुखर्जी) भाषण किसी को याद नहीं रहेगा हां, उनकी तस्वीर का इस्तेमाल जरूर किया जाएगा। लेकिन कुशल राजनेता मुखर्जी बिना किसी दबाव में आए संघ के कार्यक्रम में गए और अपने ‘उच्चस्तरीय’ भाषण के जरिये संघ को उसी के मच पर कई नसीहतें दें डालीं। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं के सुर बदल गए और उन्होंने आखिरकार राहत की सांस ली।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बात करने आया हूं। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा बहुलतावाद एवं सहिष्णुता में बसती है। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने 30 मिनट के भाषण का अंत धन्यवाद, जय हिंद और वंदेमातरम् बोल कर किया। मुखर्जी ने कहा कि भेदभाव, नफरत से भारत की पहचान को खतरा है। उन्होंने कहा कि सहनशीलता हमारे समाज का आधार है। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता केवल हमारी राष्ट्रीय पहचान को कमजोर करेगी। राष्ट्रवाद किसी धर्म और भाषा में बंटा नहीं है।

मुखर्जी ने कहा कि भारत के लोग 122 से ज्यादा भाषा और 1600 से ज्यादा बोलियां बोलते हैं। यहां सात बड़े धर्म के अनुयायी हैं और सभी एक व्यवस्था, एक झंडा और एक भारतीय पहचान के तले रहते हैं। अपने भाषण के जरिए मुखर्जी ने विरोध के बावजूद संघ के कार्यक्रम में जाने का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि मुझे भारत पर अपनी बात रखनी है। साथ ही मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बात करने आया हूं। तीनों को अलग-अलग रूप में देखना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि सबका साथ जरूरी है। इससे पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ सिर्फ हिंदुओं का संगठन नहीं है। संघ एक लोकतांत्रिक संगठन है। उन्होंने कहा कि सरकारें बहुत कुछ कर सकती हैं, लेकिन सब कुछ नहीं कर सकती हैं। उन्होंने साफतौर पर कहा कि घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान क्षीण पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संवाद में भिन्न मतों को स्वीकार किया जाना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति की तीन अहम बातें

  • पूर्व राष्ट्रपति ने कहा देशभक्ति का मतलब देश के प्रति आस्था है। सबने मिलकर देश को उन्नत बनाया है। प्रणब ने कहा कि राष्ट्रीयता देश के प्रति समर्पण और आदर का नाम है।
  • मुखर्जी ने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद यूरोपीय राष्ट्रों से अलग है। भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम में है। हमारी राष्ट्रीय पहचान हासिल करने की एक लंबी प्रक्रिया रही है। इसमें भाषिक और धार्मिक विविधता के लिए पूरी जगह है। भारत के राष्ट्रवाद में सारे लोग समाहित हैं।
  •  जब किसी महिला या बच्चे के साथ बर्बरता होती है, तो देश का नुकसान होता है। हिंसा से डर का भाव आता है। हमें शारीरिक-मौखिक हिंसा को नकारना चाहिए। लंबे वक्त तक हम दर्द में जिए हैं। शांति, सौहार्द और खुशी फैलाने के लिए हमें संघर्ष करना चाहिए।

हेडगेवार को बताया ‘भारत माता का महान सपूत’

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक सरसंघचालक केशव बलिराम हेडगेवार की जन्मस्थली पर गये और उन्होंने उन्हें भारत माता का महान सपूत बताया। मुखर्जी ने आरएसएस मुख्यालय में अपने बहुप्रतीक्षित भाषण से पहले हेडगेवार की जन्मस्थली पर आंगुतक पुस्तिका में लिखा, ‘‘आज मैं भारत माता के महान सपूत को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने आया हूं।’’

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि इस मौके पर सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्य मौजूद थे जिन्हें विशेष अतिथि के रुप में निमंत्रित किया गया था। मुखर्जी तंग गलियों से गुजरते हुए उस मकान तक पहुंचे जहां हेडगेवार पैदा हुए थे। मकान में प्रवेश से पहले उन्होंने अपने जूते उतारे। सूत्रों के अनुसार हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने से जुड़ी मुखर्जी की यह यात्रा उनके निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी और पूर्व राष्ट्रपति ने अचानक ऐसा करने का निर्णय लिया।

कांग्रेस बोली- पूर्व राष्ट्रपति ने संघ को दिखाया सच का आईना

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय में संबोधन के बाद कांग्रेस ने संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि मुखर्जी ने संघ को ‘सच का आईना’ दिखाया एवं नरेंद्र मोदी सरकार को ‘राजधर्म’ की याद दिलाई। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ”पूर्व राष्ट्रपति का आरएसएस मुख्यालय का दौरा बड़ी चर्चा का विषय बन गया था। देश की विविधता और बहुलता में विश्वास करने वाले चिंता व्यक्त कर रहे थे। लेकिन मुखर्जी ने आरएसएस को सच का आईना दिखाया।”

कांग्रेस नेता ने कहा कहा, ”मुखर्जी ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में आरएसएस को सच का आईना दिखाया है। उनको बहुलवाद, सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता और समग्रता के बारे में पाठ पढ़ाया है।” उन्होंने कहा, ”मुखर्जी ने वर्तमान मोदी सरकार को ‘राजधर्म’ की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार हमारी विविधता, गैर-हिंसा, बहुसंस्कृतिवाद और विचारों को आत्मसात करे। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि लोगों की खुशी में ही राजा का सुख है, उनका कल्याण ही उसका कल्याण है।”

कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ”क्या आरएसएस मुखर्जी की नसीहत को सुनने और मानने के लिए तैयार है? क्या वह अपने भीतर परिवर्तन के लिए तैयार है? क्या आरएसएस बहुलवाद, सहनशीलता, अहिंसा, धर्मनिरपेक्षता और विविधता के मूल्यों को स्वीकारने को तैयार है? उन्होंने पूछा, ”क्या वह दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचितों के ये पूर्वाग्रह त्याग देने के लिए तैयार है? क्या वह वैज्ञानिक सोच को मानेगी?” उन्होंने कहा कि मोहन भागवत को इन सवालों का जवाब देना चाहिये।

मुखर्जी द्वारा अतिथि पुस्तिका में आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार को ‘भारत मां का महान सपूत’ बताने के बारे में सुरजेवाला ने कहा कि व्यक्ति अगर कोई औपचारिकता के लिए कहता है तो उसे ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि जो बातें उन्होंने भाषण में कही हैं, वो अहम हैं। सुरजेवाला ने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कुछ वाकयों का जिक्र करते हुए दावा किया कि आरएसएस का भारत की आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं है।

 

 

 

 

 

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