AK के ‘मोदी विरोधी’ विज्ञापनों का तोड़ ढूंढने में जुटा केंद्र, बनेगी एक्सपर्ट्स की कमेटी

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केंद्र दिल्ली सरकार के पीएम नरेंद्र मोदी से जुड़े विज्ञापनों से परेशान है। टीवी, रेडियो, प्रिंट के अलावा होर्डिंग्स पर नजर आ रहे इन विज्ञापनों में केजरीवाल पीएम को निशाना बनाते नजर आते हैं। केंद्र का मानना है कि केजरीवाल सरकार के ये विज्ञापन पीएम की छवि खराब कर रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्र इस जांच में जुट गया है कि क्या ये विज्ञापन अवैध करार दिए जा सकते हैं या नहीं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इसके लिए एक कमेटी भी बनाने जा रही है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि सरकारी पैसे से बने ऐसे विज्ञापनों को हटवाया जा सके।

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तेज हुई कमेटी बनाने की प्रक्रिया

सूत्रों के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय विज्ञापन के मामले में एक्सपर्ट्स की कमेटी बनाने जा रहा है। इसका काम ऐसे तरीके ढूंढना होगा, जो सरकारी पैसे से बने विज्ञापनों को बंद करने का रास्ता सुझाए। साथ ही यह तय करे कि ऐसे राजनीतिक विज्ञापनों में क्या होना चाहिए और क्या नहीं? गौरतलब है कि कोई साफ विज्ञापन नीति नहीं होने से केंद्र इस मामले में दिल्ली सरकार के लिए गाइडलांस जारी नहीं कर पा रहा।

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ऐसी होगी कमेटी

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय तीन एक्सपर्ट्स की कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। इसमें रिटायर्ड नौकरशाह और विज्ञापन जगत के किसी विशेषज्ञ को रखा जा सकता है। इस बारे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से राय भी मांगी। कानून मंत्रालय ने फिलहाल ‘प्रशासनिक मामला’ बताते हुए और अधिक जानकारी जुटाने की बात कही है।

कौन से विज्ञापनों पर समस्या 

AAP सरकार ने हाल में टीवी चैनलों और रेडियो पर दो मिनट के विज्ञापनों की सीरीज जारी की है। इसमें ‘जनता के लिए किए गए काम’ गिनाए गए हैं। ‘दिल्ली सरकार को ठीक से काम न करने देने के लिए’ पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया गया है। एक विज्ञापन में कहा गया है, ”वे (केंद्र) परेशान करते रहे हम काम करते रहे।” इसके अलावा, एक विज्ञापन में सीएम अरविंद केजरीवाल पीएम से यह रिक्वेस्ट करते हैं कि राजधानी में कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए दिल्ली पुलिस को उनके कंट्रोल में दे दें।

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