राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नेताओं की बयानबाजी, जानिए किसने क्या कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदी के मामले में मोदी सरकार को शुक्रवार (14 दिसंबर) को क्लीन चिट दे दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया।

राफेल

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। शीर्ष अदालत ने कहा कि लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश इन विमानों के बगैर नहीं रह सकता है।

तीन सदस्यीय पीठ की तरफ से फैसला पढ़ते हुए प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने कहा कि लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है। पीठ ने कहा कि खरीदी, कीमत और ऑफसेट साझेदार के मामले में हस्तक्षेप के लिए उसके पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायालय ने कहा कि सितंबर 2016 में राफेल सौदे को जब अंतिम रूप दिया जा रहा था उस वक्त किसी ने इसकी खरीद पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि राफेल सौदे पर सवाल उस वक्त उठे जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने बयान दिया, यह न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं हो सकता है।न्यायालय ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

अदालत की निगरानी में राफेल सौदे की जांच कराने की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं पर 14 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी। राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में अनियमित्ताओं का आरोप लगाते हुये इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का सीबीआई को निर्देश देने और न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच के अनुरोध के साथ ये याचिकायें दायर की गयी थीं।

याचिका दायर करने वालों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो नेता और पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और विनीत ढांडा तथा आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। जहां एक केंद्र सरकार विपक्ष पर हमलावर हो गई है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस इस मामले में JPC जांच की मांग पर अड़ गई है।

जानिए किसने क्या कहा

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन पर सरकार को बदनाम करने का प्रयास करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करने का भी आरोप लगाया। राजनाथ सिंह ने कहा, कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष ने सियासी फायदे के लिए राफेल मामले में देश को गुमराह करने की कोशिश की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की छवि को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आज के फैसले के बाद कांग्रेस अध्यक्ष को इस सदन से और देश से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस ने की जेपीसी जांच की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, राफेल सौदे का मामला अनुच्छेद 132 और 32 से जुड़ा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट विमान के मूल्य और सौदे की प्रकिया से जुड़ी संवेदनशील रक्षा अनुबंध पर फैसला नहीं दे सकता। इस मामले की सिर्फ जेपीसी से जांच कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले से कांग्रेस पार्टी के आरोप सच साबित होते हैं। सुरजेवाला ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने आज उस बात पर मुहर लगा दी जो कांग्रेस पार्टी कई महीनों से कहती आ रही थी। हमने पहले ही कहा था कि इस तरह के संवेदनशील रक्षा मामलों पर फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट मंच नहीं है।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह राफेल पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले की अधूरी बात कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मूल्य और सौदे की प्रक्रिया पर वह टिप्पणी नहीं करेगा, क्योंकि यह उसके दायरे में नहीं आता। हमारी मांग थी कि इस पर जेपीसी का गठन हो। जेपीसी के जरिए इसकी जांच कराई जाए, जिस पर सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। मुख्य मुद्दा विमान की कीमत से जुड़ा है।

राफेल मुद्दा केवल संसद में हल हो सकता है: शिवसेना नेता संजय राउत

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है, ‘सुप्रीम कोर्ट ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। मूल्य निर्धारण करने का फैसला सर्वोच्च न्यायालय का काम नहीं है। इसी प्रकार राम मंदिर निर्माण करना भी सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है। राफेल मुद्दा केवल संसद में हल हो सकता है न कि सुप्रीम कोर्ट में।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनिल अंबानी ने किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अनिल अंबानी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। अनिल अंबानी ने कहा, राफेल पर सभी याचिकाओं को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। ये साबित करता है कि राफेल पर सभी आरोप झूठे थे। सभी आरोप गलत, निराधार और राजनीति से प्रभावित थे।

राफ़ेल ख़रीद में भ्रष्टाचार हुआ है JPC बनाकर जांच कराई जाए: आप नेता संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि, ‘सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कोई नकारात्मक बात कहना अनुचित जनता की अदालत और संसद में जाने का विकल्प खुला है राफ़ेल ख़रीद में भ्रष्टाचार हुआ है JPC बनाकर गहनता से जाँच कराई जाए।’ संजय सिह ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘सबरी माला और राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर सवाल खड़ा करने वाले अमित शाह और भाजपाई आज प्रसन्न हैं।’

राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत: प्रशांत भूषण

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हमारी नजर में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि हम पुनर्विचार याचिका दायर करने को लेकर विचार करेंगे और इस पर फैसला लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सरकार को खुश नहीं होना चाहिए: कांग्रेस नेता आनंद शर्मा 

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, प्रधानमंत्री और बीजेपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसला पर खुश नहीं होना चाहिए। कोर्ट का फैसला स्वयं में विरोधाभासी है।

राफेल की कीमत है मुख्य मुद्दा: आशुतोष

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता आशुतोष ने ट्वीट कर कहा कि कोर्ट का फैसला मोदी सरकार के लिए राहत है, मुख्य मुद्दा विमान की कीमत है, जिसका जवाब कोर्ट के फैसले से नहीं मिला।

टीएमसी ने भी की जेपीसी जांच की मांग

वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सौगत रॉय ने कहा कि राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला हो, लेकिन राजनीतिक पार्टियां राफेल पर जेपीसी गठन की मांग कर रही हैं।

 

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