PM मोदी के चुनावी यात्रा से सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत, 40 हजार करदाताओं का समय भी हुआ बर्बाद

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच राज्यों (उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा) में चल रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से सबसे बड़े स्टार प्रचारक के रूप में लगातार चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। पीएम लोकसभा चुनाव की तरह इन चुनावों में भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इन राज्यों में जबसे चुनाव का बिगुल बजा है तब से पीएम दिल्ली से ज्यादा इन पांच राज्यों में समय दे रहे हैं।

मोदी

इस दौरान पीएम मोदी ने उत्तराखंड में चार रैलियों को संबोधित कर चुके हैं, वहीं इससे बड़ा राज्य होने के बावजूद पंजाब में मात्र दो रैली को संबोधित किए। दरअसल, जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड में बीजेपी को जीत की उम्मीद है, लेकिन पंजाब में सरकार बनाने को लेकर पार्टी असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रही है।

चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि 403 सीटों वाले उत्तर प्रदेश के मतदाता 11 मार्च को आने वाले चुनावी परिणाम के बाद पीएम मोदी के भविष्य का फैसला करेंगे। कई लोगों को ये सुनने में अटपटा जरूर लगेगा कि आखिर एक राज्य के लोग पूरे देश की या फिर समर्थकों में अत्यंत लोकप्रिय मौजूदा प्रधानमंत्री की किस्मत का फैसला कैसे कर सकते हैं। लेकिन इसकी वजह ये है कि यूपी में हार-जीत दिल्ली की सियासत को बुरी तरह प्रभावित करेगी।

बीजेपी के लिए यूपी का चुनाव कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पीएम मोदी ने यहां अभी तक करीब 20 चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं, जबकि अखिरी चरण(8 मार्च) के चुनाव तक यह आंकड़ा 30 के पार भी जा सकता है। वहीं बिहार विधानसभा चुनाव में पीएम ने करीब 31 रैलियों को संबोधित किया था।

पूर्व वायु सेना के अधिकारी और विमानन विशेषज्ञ खालिद एहसान ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में बताया कि पीएम मोदी की तरह कोई वीआईपी व्यक्ति जब किसी रोड से गुजरने वाला होता है तो उससे करीब आधे घंटे पहले ही ट्रैफिक को पूरी तरह से रोक दिया जाता है।

साथ ही पीएम की फ्लाइट के लैंड होने के करीब 20 मिनट पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल किसी भी फ्लाइट को उतरने या उड़ने की अनुमति नहीं देता है। इस दौरान हजारों की संख्या यात्रि आसमान में ही चक्कर लगाते रहते हैं। प्रधानमंत्री की रैली की वजह से आसमान और जमीन दोनों तरफ लोगों का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है।

इस दौरान अगर निर्धारित समय में पीएम नहीं पहुंचे तो और भी समय नष्ट हो सकता है। एहसान का कहना है कि यात्रियों के समय की बर्बादी के अलावा सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान होता है। एक अनुमान के मुताबिक, पीएम की फ्लाइट लैंड होने के दौरान करीब 30 मिनट तक सभी विमानों को आसमान में चक्कर लगाते पड़ते हैं, जिस वजह से हर विमान को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।

उस दौरान अगर दिल्ली में 20 फ्लाइट उड़ान या लैंड नहीं करते हैं तो 30 मिनट के हिसाब से पांच घंटे बर्बाद होता है। तो एक वीआईपी की सेवा में आम करदाताओं का करीब 100 घंटे बर्बाद हो जाता है। अगर इन बर्बादियों को रुपये में तब्दील करें तो सरकार को करीब 40 करोड़ रुपये की चपत लगती है।

दूसरे शब्दों में कहें तो पीएम मोदी के प्रत्येक चुनावी रैली में आने जाने के दौरान भारतीय करदाताओं का करीब 20 करोड़ रुपये बर्बाद हो जाता है। उदाहरण के तौर पर 100 यात्रियों की भरी 200 प्लेन अगर प्रभावित होती हैं तो करीब 20,000 करदाताओं का किमती समय नष्ट हो जाता है।

इस हिसाब से एयरपोर्ट पर करीब 40,000 भारतीयों का किमती समय बर्बाद हो जाता है। पूर्व वायुसेना अधिकारी अहसान का कहना है भारत से उलट अमेरिका में राष्ट्रपति सार्वजनिक एयरपोर्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, क्योंकि लोगों के समय का महत्व वहां समझा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हजारों भारतीयों का करोड़ों रुपये और किमती समय बर्बाद कर पीएम मोदी अपने सांप्रदायिक भाषणों के जरिए लोगों को क्या देते हैं? सिर्फ कब्रिस्तान और श्मशान के नाम पर आम जनता बीच मतभेद पैदा करने का काम किया जाता है।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक चुनावी रैली के दौरान ‘सबका साथ सबका विकास’ का मतलब समझाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भेदभाव सबसे बडा संकट है। पीएम ने कहा था कि ‘अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए।’

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