प्रधानमंत्री बोले- “कांग्रेस को भंग करना चाहते थे महात्मा गांधी”, अर्नब गोस्वामी के चैनल ने बताया कांग्रेस पर PM मोदी का ‘ब्लॉग स्ट्राइक’

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अंग्रेजों के खिलाफ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा शुरू की गई ‘दांडी मार्च’ के 89 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (12 मार्च) को एक ब्लॉग लिखकर बापू को याद किया। हालांकि, अपने ब्लॉग में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका नहीं छोड़ा। पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि गांधी जी कांग्रेस कल्चर को अच्छी तरह से समझ चुके थे। इसीलिए वे चाहते थे कि आजादी के बाद कांग्रेस को भंग कर दिया जाए। वहीं, अर्नब गोस्वामी के चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ ने प्रधानमंत्री के इस इस ब्लॉग को कांग्रेस पर पीएम मोदी का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ घोषित कर दिया है।

 

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए अपने ब्लॉग में लिखा है, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस की संस्कृति गांधीवादी विचारधारा के बिल्कुल विपरीत हो चुकी है। बापू ने कहा था, “…मेरे लिए भारत की असली आजादी वो है, जब देशवासियों में भाईचारे की अटूट भावना हो।” गांधी जी ने हमेशा अपने कार्यों के माध्यम से ये संदेश दिया कि असमानता और जाति विभाजन उन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। दुख की बात है कि कांग्रेस ने समाज को विभाजित करने में कभी संकोच नहीं किया। सबसे भयानक जातिगत दंगे और दलितों के नरसंहार की घटनाएं कांग्रेस के शासन में ही हुई हैं।”

उन्होंने आगे लिखा है, “कांग्रेस ने हमेशा वंशवादी संस्कृति को बढ़ावा दिया। लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी कभी कोई आस्था नहीं रही है। गांधी जी कांग्रेस कल्चर को अच्छी तरह से समझ चुके थे। इसीलिए वे चाहते थे कि कांग्रेस को भंग कर दिया जाए, विशेषकर 1947 के बाद। उन्होंने कहा था, ‘’बड़े ही दुख के साथ मुझे ये कहना पड़ रहा है कि कई कांग्रेसियों ने स्वराज को केवल एक राजनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा है, ना कि अनिवार्यता के रूप में।’’ उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता सिर्फ साम्प्रदायिक जोड़-घटाव में व्यस्त हैं। 1937 में ही वे कह चुके थे, ‘’अनियंत्रित भ्रष्टाचार को सहने की बजाय मैं चाहूंगा कि पूरी कांग्रेस को शालीनता के साथ समाधि दे दी जाए।’’

पीएम मोदी ने आगे लिखा है, “हालांकि, दांडी मार्च अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण नमक कानून का विरोध करने के उद्देश्य से निकाला गया था। लेकिन, इस आंदोलन ने अंग्रेजी शासन की नींव को हिला दिया था। दांडी मार्च अन्याय और असमानता से लड़ने का एक मजबूत प्रतीक बन गया। क्या आपको पता है कि दांडी मार्च की योजना तैयार करने में किसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी? दरअसल, इसके पीछे हमारे महान नेता सरदार वल्लभभाई पटेल थे। वे संगठन की बारीकियों को समझते थे। उन्होंने दांडी मार्च की ना केवल रूपरेखा तैयार की, बल्कि पल-पल उस पर अपनी पैनी नजर भी बनाए रखी थी।

उन्होंने आगे लिखा है, “अंग्रेज, सरदार साहब से इतने अधिक भयभीत हो गए थे कि उन्होंने दांडी मार्च से कुछ दिन पहले ही उन्हें यह सोच कर गिरफ्तार कर लिया था कि इससे गांधी जी डर जाएंगे। हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। क्योंकि अंग्रेजी साम्राज्य से लड़ने का मजबूत इरादा हर मुश्किल और डर पर भारी था! पिछले दिनों मुझे दांडी में उस जगह जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहां बापू ने अपनी मुट्ठी में नमक उठाकर अंग्रेजों को चुनौती दी थी। वहां पर एक अत्याधुनिक संग्रहालय भी स्थापित किया गया है। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि उसे देखने अवश्य जाएं।”

बता दें कि 89 साल पहले 1930 में आज ही के दिन ‘दांडी मार्च’ की शुरूआत हुई थी। इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अहम पड़ाव के रूप में माना जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस दिन अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से नमक सत्याग्रह के लिए दांडी यात्रा शुरू की थी। इस मार्च के जरिए बापू ने अंग्रेजों के बनाए नमक कानून को तोड़कर उस सत्ता को चुनौती दी थी, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसके साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता है।

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