मन की बात: PM मोदी ने GST को बताया ‘ईमानदारी का उत्सव’, पढ़िए संबोधन की महत्वपूर्ण बातें

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‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए महिने की आखिरी रविवार के दिन यानी 24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 45वीं बार देश की जनता को संबोधित किया। पीएम ने अपने रेडियो कार्यक्रम में इस बार खास तौर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), योग, खेल और डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में चर्चा की। पीएम ने यह भी कहा कि योग अब राष्ट्र, जाति और धर्म की सीमाओं को तोड़कर सबको एक कर रहा है।

फाइल फोटो

प्रधानमंत्री ने जीएसटी को ईमानदारी की जीत एवं सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि इस नई कर व्यवस्था का एक साल के भीतर ही स्थिरता हासिल करना देश के लिए बहुत बड़ी सफलता है। मोदी ने अपने इस कार्यक्रम में चौथे योग दिवस, डाक्टर्स दिवस के अलावा किसानों की समस्याओं का भी जिक्र किया तथा कबीरदास से लेकर गुरुनानक जैसे संतों और डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के समाज एवं देश को योगदान की चर्चा की।

इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान और भारत के बीच क्रिकेट टेस्ट मैच के बारे में भी चर्चा की और गेंदबाज़ राशिद खान के प्रदर्शन की सराहना की। सदी के सबसे बड़े कर सुधार के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी को एक साल पूरा होने वाला है। ‘एक देश, एक टैक्स’ देश के लोगों का सपना था, वह आज हक़ीक़त में बदल चुका है। उन्होंने कहा, “एक देश, एक कर सुधार, इसके लिए अगर मुझे सबसे ज्यादा किसी को श्रेय देना है तो मैं राज्यों को देता हूं। जीएसटी सहकारी संघवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां सभी राज्यों ने मिलकर देशहित में फैसला लिया और तब जाकर देश में इतना बड़ा कर सुधार लागू हो सका।”

समाचार एजेंसी वार्ता के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक जीएसटी परिषद की 27 बैठकें हुईं हैं और हम सब गर्व कर सकते हैं कि भिन्न-भिन्न राजनीतिक विचारधारा के लोग वहां बैठते हैं, भिन्न-भिन्न राज्यों के लोग बैठते हैं, अलग-अलग प्राथमिकता वाले राज्य होते हैं लेकिन उसके बावजूद जीएसटी परिषद में अब तक जितने भी निर्णय किए गए हैं, सभी सर्वसहमति से किये गए हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी से पहले देश में 17 अलग-अलग प्रकार के टैक्स हुआ करते थे, लेकिन इस व्यवस्था में अब सिर्फ एक ही टैक्स पूरे देश में लागू है।

GST को बताया ‘ईमानदारी का उत्सव’

वार्ता के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी ईमानदारी की जीत है और ईमानदारी का एक उत्सव भी है। पहले देश में टैक्स के मामले में इंस्पेक्टर राज की बहुत शिकायतें आती रहती थीं। जीएसटी में इंस्पेक्टर की जगह आईटी यानी सूचना प्रौद्योगिकी ने ले ली है। रिटर्न से लेकर रिफंड तक सब कुछ ऑनलाइन आईटी के द्वारा होता है। जीएसटी के आने से चेक पोस्ट खत्म हो गई और माल, सामानों की आवाजाही तेज़ हो गई। जिससे न सिर्फ़ समय बच रहा है बल्कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी इसका काफ़ी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी शायद दुनिया का सबसे बड़ा टैक्स होगा। भारत में इतना बड़ा कर सुधार इसलिए सफ़ल हो पाया क्योंकि देश के लोगों ने इसे अपनाया और जन-शक्ति के द्वारा ही जीएसटी की सफ़लता सुनिश्चित हो सकी।

उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि इतना बड़ा सुधार, इतना बड़ा देश, इतनी बड़ी जनसंख्या इसको पूर्ण रूप से स्थिर होने में पांच से सात साल का समय लगता है लेकिन देश के ईमानदार लोगों का उत्साह, देश की ईमानदारी का उत्सव जन-शक्ति की भागीदारी का नतीज़ा है कि एक साल के भीतर यह नई कर प्रणाली अच्छी जगह बना चुकी है, स्थिरता प्राप्त कर चुकी है और आवश्यकता के अनुसार अपनी आतंरिक नैसर्गिक व्यवस्था के द्वारा सुधार भी करती रहती है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी सफ़लता सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने अर्जित की है|

 

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