भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं के खिलाफ 100 से अधिक पूर्व सैनिकों ने PM मोदी को लिखा पत्र

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केंद्र की मोदी सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान सांप्रदायिक घटनाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल नजर आ रही है। लेकिन अब 100 से ज्यादा अलग-अलग रिटायर्ड सैनिकों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर देश भर में भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाई है। बता दें कि, पीएम को खत ऐसे समय में लिखा गया है जब संसद में इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमला बोल रही है।

सैनिकों
फोटो- जनसत्ता

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों सेनाओं से रिटायर हुए करीब 114 पूर्व सैनिकों ने अपने हस्ताक्षर वाले खत में लिखा है कि हमने अपना करियर देश की सुरक्षा में लगाया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं और उनका केवल साझा कमिटमेंट भारत का संविधान है। उनके खत में लिखा है कि वह एक साथ मिलकर ‘नॉट इन माइ नेम’ मुहिम का समर्थन करते हैं और देश में वर्तमान में भय, डर, नफरत और शक के माहौल का विरोध करते हैं।

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साथ ही उन्होंने अपने खत में लिखा है कि वह स्वयभू हिंदू धर्म की रक्षा करने वालों द्वारा समाज में हो रहे हमलों के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह जो कुछ भी हो रहा है वह सब कुछ भारत के संविधान और सैन्य बलों के विचार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम और दलितों पर हो रहे हमलों की निंदा करते हैं।

ख़बरों के मुताबिक, साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया, यूनिवर्सिटी, पत्रकार, बुद्धिजीवी की आजादी पर हो रहे हमलों और उन्हें राष्ट्रविरोधी करार दिए जाने की हम निंदा करते हैं। बताया जा रहा है कि, यह खत देश के सभी मुख्यमंत्रियों को भी भेजा गया है।

बता दें पिछले महीने 16 साल के जुनैद की ट्रेन में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद देश के कई राज्य में मॉब लिंचिंग के खिलाफ ‘Not In My Name’ कैम्पेन के जरिए आवाज उठाई गई थी।

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PM मोदी ने तोड़ी चुप्पी:

पीएम मोदी ने जुनैद हत्याकांड और देश भर में भीड़ के द्वारा धर्म के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर गुरुवार(29 जून) को चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा बयान दिया। पीएम मोदी ने कहा कि मैं देश के वर्तमान माहौल की ओर अपनी पीड़ा व्यक्त करना चाहता हूं और अपनी नाराजगी भी व्यक्त करता हूं। गाय पर बोलते हुए पीएम मोदी भावुक हो गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार नहीं है। उनकी टिप्पणी कथित गोरक्षकों द्वारा किए गए हालिया हमलों और विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई है। महात्मा गांधी के गुरू श्रीमद राजचंद्रजी की 150वीं जयंती के मौके पर मोदी ने गुजरात के साबरमती आश्रम में संबोधन के दौरान यह बात कही।

हिंसा की कुछ बड़ी वारदातें:

  • 22 जून को बल्लभगढ़ में ट्रेन से सफर कर रहे जुनैद नामक युवक की कथित तौर पर बीफ को लेकर हुए विवाद में हत्या कर दी गई। जबकि उसके दो भाइयों को घायल कर दिया।
  • 30 अप्रैल को असम के नागौन जिले के पास गाय चोरी के आरोप में दो मुस्लिमों की हत्या कर दी।
  • 1 अप्रैल को राजस्थान के अलवर में 50 वर्षीय पहलू खान की गोतस्करी के आरोप में स्वयंभू गोरक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
  • 29 जून को प्रतिबंधित मांस ले जाने के आरोप में झारखंड में एक युवक को बेकाबू भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला।भीड़ ने सुबह साढ़े नौ बजे मनुआ-फुलसराय निवासी अलीमुद्दीन अंसारी को इतना पीटा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
  • 26 जुलाई 2016 को मंदसौर स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने बीफ ले जाने के शक में दो मुस्लिम महिलाओं की बर्बर तरीके से पिटाई की थी।
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