पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में कुलभूषण जाधव को जल्द फांसी देने की याचिका दायर

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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को तत्काल फांसी दिए जाने की मांग की गई है। याचिका में कोर्ट से अपील की गई है कि वह सरकार को पाकिस्तान के आंतरिक कानूनों के मुताबिक जाधव मामले पर जल्द से जल्द फैसला लेने का निर्देश दे।Jadhavसाथ ही यह अपील भी की गई है कि अगर जाधव को मिली फांसी की सजा को बदला नहीं जाता है, तो जल्द से जल्द उनकी सजा पर अमल किया जाए। बता दें कि पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने अपने अंतरिम आदेश के जरिए जाधव पर कोई अंतिम आदेश के पहले उसकी फांसी की सजा की तामील पर रोक लगा दी थी।

पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक, यह याचिका मुजामिल अली नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई है। मुजामिल की इस याचिका को वकील फारूक नाइक ने कोर्ट में दायर किया है। नाइक पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के नेता और पूर्व सेनेट अध्यक्ष हैं।

याचिका में संघीय सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है कि अगर जाधव की ओर से कोई अपील लंबित है तो उस पर देश के कानून के अनुरूप शीघ्र कोई निर्णय लिया जाए। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की कि अगर जाधव अपनी सजा को पलटवाने में नाकाम रहता है तो उसकी सजा की तामील शीघ्र की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की अपील की है कि जाधव केस में कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई और सभी कानूनी प्रक्रियाओं पर अमल किया गया। याचिकाकर्ता ने यह साफ करने को भी कहा है कि भारत की मांगों के मुताबिक जाधव को वकील की सेवा भी उपलब्ध कराई गई थी। इस याचिका में प्रांतीय सरकार, आंतरिक एवं कानून सचिव और पाकिस्तान आर्मी ऐक्ट (PPA) 1952 के अंतर्गत गठित कोर्ट ऑफ अपील को रिस्पॉन्डेंट बनाया गया है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि पाकिस्तान के नागरिकों को ऐसे लोगों से बदला लेने का अधिकार है जो उनके देश के खिलाफ साजिश रचते हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि दोषी पाए गए आतंकवादी के अधिकार की तुलना में पाकिस्तानी नागरिकों का यह अधिकार कहीं ज्यादा बड़ा है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि भारत की हरकतें और ICJ में उसके द्वारा दी गई दलीलें 2008 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन करती हैं। साथ ही इन्हें वियना संधि के भी खिलाफ बताया गया है। याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि पाकिस्तान वियना संधि की शर्तें मानने के लिए विवश नहीं है।

गौरतलब है कि भारत ने जाधव को सुनाई गई सजा के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट (ICJ) में अपील की थी। जिसके बाद ICJ ने अपने अंतरिम फैसले में जाधव की सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि जब तक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अपना आखिरी फैसला नहीं दे देती तब तक जाधव की फांसी पर रोक रहेगी।जाधव केस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के हाथों मिली हार के बावजूद पाकिस्तान अपने रुख पर कायम है। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले साल मार्च में जाधव को बलूचिस्तान से पकड़ा था। पाकिस्तान जाधव को भारत का जासूस बताता है। उसका आरोप है कि जाधव बलूचिस्तान को अस्थिर करने की कोशिशों में शामिल थे।

वहीं, भारत ने उसके इन दावों को खारिज करते हुए साफ किया कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था। भारत द्वारा बार-बार अपील किए जाने के बाद भी पाकिस्तान ने जाधव को वकील मुहैया नहीं कराया। एक मिलिटरी कोर्ट ने जाधव को मौत की सजा सुनाई है।

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