“मीडिया ट्रायल भी नफरत फैलाने वाले भाषण का हिस्सा हैं”: अर्नब गोस्वामी और नविका कुमार के ‘टीवी बहस’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

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रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्नब गोस्वामी और उनके पूर्व सहयोगी नविका कुमार के लिए एक और शर्मिंदगी भरी ख़बर सामने आई है। कांग्रेस के एक प्रवक्ता की पत्नी और पार्टी के एक दिवंगत नेता की पत्नी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाल के दिनों में ‘न्यूज कवरेज’ की सामग्री और ‘टीवी बहस’ “अत्यधिक विषाक्त, ध्रुवीकृत और व्यंग्योक्ति से भरी हो गई हैं।”

अर्नब गोस्वामी

दिवंगत नेता राजीव त्यागी की पत्नी संगीता त्यागी और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की पत्नी कोटा नीलिमा ने नफरत फैलाने वाले भाषण को लेकर लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने एक नई याचिका में शोध मंच ‘रेट द डिबेट’ के अध्ययन ‘मीडिया ट्रायल्स’ की रिपोर्ट को रिकार्ड में लेने के लिए न्यायालय की अनुमति का अनुरोध किया। यह रिपोर्ट दो प्रसिद्ध टीवी पत्रकारों द्वारा संचालित बहस और चर्चा की सामग्री पर अध्ययन है। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी एंकरों ने ‘मीडिया ट्रायल’ के जरिए लगातार झूठे विमर्श बनाए हैं जो उनके “गुप्त उद्देश्य” के प्रति जनता की राय को प्रभावित करते हैं। याचिका में कहा गया कि मीडिया ट्रायल भी नफरत फैलाने वाले भाषण का हिस्सा हैं।

संगीता त्यागी के पति की हाल ही में एक टीवी बहस में भाग लेने के बाद दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। संगीता और नीलिमा ने सुदर्शन टीवी मामले में हस्तक्षेप के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अनुरोध किया था कि ख़ास एंकरों और “नफरत फैलाने वाली भाषा को बढ़ावा देने वालों’’ को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।

वकील सुनील फर्नांडीस के माध्यम से दायर की गई ताजा याचिका अंग्रेजी के दो समाचार चैनलों (रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ) के प्राइम टाइम कार्यक्रमों के विस्तृत विश्लेषण पर आधारित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकांश कार्यक्रम अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंधित एकल मुद्दे पर केंद्रित थे। लेखक और शोधकर्ता डॉ कोटा नीलिमा ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि कैसे 31 जुलाई 2020 से 15 सितंबर 2020 के बीच गोस्वामी की 65% टीवी बहस और 16 जून 2020 से 6 अक्टूबर 2020 तक नविका कुमार द्वारा की गई कुल बहस का 69% एक विषय पर थी। यह विषय थी- ‘बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत’।

इसमें कहा गया है, ‘‘मीडिया ट्रायल नफरत फैलाने वाले भाषण का एक और पहलू है। मीडिया ट्रायल कई कारणों से हो सकते हैं। उदाहरण के लिए यह टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) का अधिक हिस्सा पाने के लिए हो सकता है या यह कुछ और अधिक कुटिल हो सकता है जिसमें कुछ निजी टेलीविज़न चैनल केंद्र सरकार के लिए दुष्प्रचार मशीनों के रूप में कार्य करते हैं।’’ (इंपुट: भाषा के साथ)

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