क्या 50 लाख पूर्व सैनिकों का भी निजी डेटा हुआ लीक? रक्षा मंत्रालय का सनसनीखेज जवाब

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ब्रिटिश कन्सल्टिंग कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स की जानकारी चुराने का मामला भारत में राजनीतिक रंग ले चुका है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस आपस में भिड़ी हुईं हैं। बुधवार (21 मार्च) को दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर चुनावों में कैंब्रिज एनालिटिका की सेवा लेने का आरोप लगाया है। फेसबुक डाटा लीक मामले में सोशल नेटवर्किग साइट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने गुरुवार (22 मार्च) को फेसबुक उपयोगकर्ता से माफी मांगी है।

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फाइल फोटो

जुकरबर्ग ने कहा कि भारत में चुनाव से पहले डाटा लीक को रोकने के लिए सुरक्षा सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने दो अरब फेसबुक उपयोगकर्ताओं से उनका विश्वास टूटने पर माफी मांगी और डाटा को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाने का वादा किया। फेसबुक के सीईओ ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि वह मामले से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। जुकरबर्ग ने कहा कि भारत जैसे देशों में आगामी चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए फेसबुक अपनी सुरक्षा सुविधाओं में इजाफा कर रहा है।

50 लाख पूर्व सैनिकों का डाटा हुआ लिक?

फेसबुक डाटा लीक मामले में भारत सहित विश्वभर में जारी घमासान के बीच भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। रक्षा मंत्रालय द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत दिए गए जवाब में जो  सनसनीखेज रहस्योद्घाटन हुआ है उसमें इस बात की आशंका व्यक्त की गई है कि एक निजी कंपनी को करीब 50 लाख पूर्व सैनिकों का ईसीएचएस कार्ड बनाने के व्यक्तिगत जानकारी दी गई थी, जिसे उसने किसी और के साथ शेयर किया है या अपने पास कॉपी करके रखा है की नहीं इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है।

यह आशंका रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली एमओडी के अधीन ईसीएचएस द्वारा दी गई जानकारी में व्यक्त की गई है। कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स की जानकारी चुराने का मामला सामने आने के बाद यह खबर बहुत ही चिंताजनक है। दरअसल, भारतीय सेना ने पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को स्वास्थ्य और कैंटीन सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत स्मार्ट कार्ड बनाया जाता है।

ईसीएचएस स्कीम के तहत रजिस्टर्ड पूर्व फौजियों को सेना के अस्पताल में इलाज वह सेना के कैंटीन से भी मिलने वाली सुविधाओं का लाभ मिल जाता है और उन्हें इधर-उधर धक्के नहीं खाने पड़ते हैं। लेकिन ईसीएचएस के तहत लाभ लेने वाले पूर्व सैनिकों को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाता है। इसके तहत करीब 50 लाख पूर्व सैनिकों का स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए आधार की तरह उनकी व्यक्तिगत डाटा (बाएं और दाएं हाथ के अंगूठे का निशान) लिया जाता है।

इसके अलावा आधार कार्ड की तरह एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएसएच) कार्ड के लिए स्कैनड फोटो, हस्ताक्षर/अंगूठे का निशान, पेंशन पेमेंट ऑडर(पीपीओ), डिस्चार्ज बुक, पुराना स्मार्ट कार्ड, नोमनी के लिए शपथ पत्र, जन्म प्रमाण पत्र/मैट्रिक पास प्रमाण पत्र लिया जाता है। सरकार का स्मार्ट कार्ड बनाने का मकसद यह था कि इसका कोई दूसरा दुरुपयोग नहीं कर पाएगा। सबसे खास बात यह है कि 50 लाख पूर्व सैनिकों का स्मार्ट कार्ड बनाने का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया।

मशहूर आरटीआई कार्यकर्ता कोमोडोर (सेवानिवृत) लोकेश बत्रा ने रक्षा मंत्रालय से यह जानने के लिए कि क्या 50 लाख पूर्व सैनिकों द्वारा दी गई निजी जानकारी कितना सुरक्षित है? इस जानकारी के लिए वह पिछले तीन महीनों से चक्कर काट रहे थे।हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले तीन महीनों से इस महत्वपूर्ण जानकारी के संबंध में बत्रा द्वारा जानकारी मांगी जा रही थी, लेकिन ईसीएचएस और रक्षा मंत्रालय इसको नजरअंदाज करते रहे।

हालांकि बत्रा के कड़ी मेहनत के बाद 21 मार्च को एमओडी में सचिव स्तर के अधिकारी एके कर्ण ने रक्षा मंत्रालय और ईसीएचएस को पत्र लिखकर साफ तौर फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि बत्रा के सवालों का जवाब आज (21 मार्च 2018) ही दिया जाए, क्योंकि आप लोगों ने इनके सवालों का पिछले कई महीनों से नजरअंदाज करते आ रहे है।

हैरान करने वाला मिला जवाब

फटकार के बाद ईसीएचएस के सीओ कर्नल राकेश शर्मा ने 22 मार्च को लोकेश बत्रा के सवालों का जवाब दिया। जवाब में बताया कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। 50 लाख पूर्व सैनिकों का डाटा जिस निजी कंपनी को दिया गया था उसने वह सभी डाटा एक स्मार्ट कार्ड में रखा था। लेकिन जब उसका टेंडर समाप्त हो गया तो उसने वह स्मार्ट कार्ड हमें वापस कर दिया। इस जवाब में सबसे खतरनाक जानकारी देते हुए कहा गया है कि, “हम यह दावा के साथ नहीं कह सकते कि उसने (निजी कंपनी) 50 लाख पूर्व सैनिकों के निजी डेटा (स्मार्ट कार्ड) का कॉपी बनाकर अपने साथ लेकर गया है या नहीं।’

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रक्षा मंत्रालय यह दावे के साथ नहीं कह रहा है तो क्या वह निजी कंपनी उन 50 लाख पूर्व सैनिकों का डाटा अपने पास रखा है या किसी और के साथ शेयर किया है? अगर उसने कॉपी करके सैनिकों की निजी जानकारी अपने साथ लेकर चला गया होगा तो यह तो बहुत ही खतरनाक बात है। इस खुलासे के बाद लोकेश बत्रा ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में कहा कि इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम लोगों की निजी जानकारी लिक हुआ है या नहीं इसकी पुष्टि जब खुद रक्षा मंत्रालय नहीं कर पा रहा है तो यह बहुत ही खतरनाक बात है।

क्या है फेसबुक डाटा लीक मामला?

बता दें कि ब्रिटिश डेटा विश्लेषण कंपनी, कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने पांच करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा बिना उनकी मंजूरी के चुरा लिए हैं और उसका उपयोग राजनेताओं की मदद के लिए किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रेक्सिट अभियान शामिल हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान मतदाताओं को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रभावित करने के लिए फेसबुक के पांच करोड़ उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग किया था।

इस मामले के सामने आने के बाद फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका दोनो को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन समेत अमेरिका में भी कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों कंपनियां इस मामले को लेकर भारी आलोचना झेल रहीं हैं। इस बीच भारत ने भी बुधवार (21 मार्च) को फेसबुक और उसके सीईओ मार्क जुकरबर्ग को कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डेटा का दुरुपयोग करने को लेकर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। रविशंकर प्रसाद ने जुकरबर्ग को चेताते हुए कहा कि आईटी कानून में हमारे पास काफी अधिकार हैं। आपको भारत में समन भी किया जा सकता है।

जुकरबर्ग ने भरोसा तोड़ने के लिए माफी मांगी

फेसबुक डाटा लीक मामले में सोशल नेटवर्किग साइट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने गुरुवार (22 मार्च) को फेसबुक उपयोगकर्ता से माफी मांगी है। जुकरबर्ग ने कहा कि भारत में चुनाव से पहले डाटा लीक को रोकने के लिए सुरक्षा सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने दो अरब फेसबुक उपयोगकर्ताओं से उनका विश्वास टूटने पर माफी मांगी और डाटा को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाने का वादा किया।

फेसबुक के सीईओ ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि वह अमेरिकी कांग्रेस के सामने मामले से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। जुकरबर्ग ने कहा कि भारत जैसे देशों में आगामी चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए फेसबुक अपनी सुरक्षा सुविधाओं में इजाफा कर रहा है।

उन्होंने कहा कि, ‘हमारा ध्यान केवल अमेरिकी चुनाव तक नहीं है बल्कि भारत, ब्राजील में होने वाले चुनाव और इस साल होने वाले अन्य चुनाव पर भी है, जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।’ उन्होंने कहा कि रूस जैसे देशों का चुनाव में हस्तक्षेप को कठिन बनाने के लिए फेसबुक को बहुत काम करने की आवश्यकता है ताकि लोग फर्जी खबरें नहीं फैला सकें।

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