कश्मीर:अब पत्थरबाजों की खैर नहीं- सेना के हाथ एक नया हथियार

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पैलेट गन के कारण हजारों कश्मीरी अपनी आखों की रोशनी गवां चुके हैं लेकिन इस बार सेना के हाथ में जो हथियार है वो पैलेट गन से भी ज्यादा है। कश्मीर घाटी में अब सेना ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैरामिलिट्री फोर्सेस और राज्य पुलिस को साउंड कैनन, मिर्ची शॉट गन और चिली ग्रेनेड्स का इस्तेमाल करने की सिफारिश की है। इससे पहले पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था जिस पर काफी विवाद हुआ।

Representational purpose only
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नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई रिव्यू कमिटी ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर यह सिफारिश की है। कश्मीर में आतंकी नेताओं के मारे जाने के बाद महीने भर से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। पैलेट गन के चलते हजारों लोग घायल हुए हैं। इनमें खासतौर पर बच्चे अपनी आंखों की रोशनी गंवा चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल ने कश्मीर में आक्रोश भर दिया है।

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जम्मू कश्मीर में सीनियर मिलिट्री कमांडर हुड्डा ने कहा, ‘पैलेट गन का विकल्प मौजूद है और इनके जरिए भीड़ को काबू किया जा सकता है। सरकार इन विकल्पों पर विचार कर रही है।’ सोनिक कैनन का प्रयोग दुनिया भर में किया जा रहा है। यह अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी ब्लास्ट की तरह काम करता है, जिससे निकलने आवाज से भीड़ को काबू किया जाता है। पीपर गन प्लास्टिक की गोलियां फायर करती है, जिनमें मिर्ची भरी होती हैं। इससे आंख, नाक और गले में जलन होती है।

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चिली ग्रेनेड्स का प्रयोग इंडिया मिलिट्री साइंटिस्टों ने किया है। यह पीपर गन के मुकाबले ज्यादा शारीरिक असहजता पैदा करता है। इनमें नॉर्थ ईस्ट की भूत जोलोकिया और नागा मिर्ची का प्रयोग किया जाता है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर के ज्यादातर हिस्से में कर्फ्यू लगा हुआ है। हुड्डा ने दक्षिणी कश्मीर में स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए 4000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का निर्देश दिया है।

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उन्होंने कहा कि आतंरिक और बाहरी तत्वों द्वारा स्थिति में तनाव पैदा किया जा रहा है। उनका इशारा अलगाववादियों और पाकिस्तान की ओर था। हुड्डा ने कहा कि युवाओं के बीच आक्रोश है और हम इसे खारिज नहीं कर सकते, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते राज्य में शांति बहाली हो।

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