पहलू खान हत्याकांड: राजस्थान पुलिस ने 6 आरोपियों को दी क्लीन चिट

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55 वर्षीय पहलू खान का नाम तो आपको याद ही होगा अगर नहीं याद है तो आइए हम आपको याद दिला देते है। पहलू खान वह शख्स थे जिन्हें राजस्थान के अलवर के बहरोड़ थाना क्षेत्र में कथित गौरक्षकों ने गोतस्करी का आरोप लगाकर उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

Pehlu Khan

उस वक्त इस हमले के बाद पूरे देश में गोरक्षा के नाम पर बहस छिड़ गई थी। चौतरफा दबाव के बाद राजस्थान पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पहलू की हत्या के लिए 6 लोगों को आरोपी बनाया था। लेकिन अब पहलू खान की हत्या मामले में एक नया मोड़ आया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में ओम यादव(45), हुकुम चंद यादव(44), सुधीर यादव(45), राहुल सैनी(24), नवीन शर्मा(48) और जगमाल यादव(73) आरोपी बनाए गए थे। ख़बर के मुताबिक, घटना के वक़्त यह सभी आरोपी जगमाल यादव की राठ गोशाला में थे और यह गोशाला जहां पहलू की हत्या वाली जगह से करीब चार किलोमीटर दूर है।

कहा जा रहा है कि राठ गोशाला के स्टाफ की ओर से पुलिस को दिए बयानों से यह बात साबित हुई है, इनके कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल की लोकेशन से भी इन बयानों की पुष्टि होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि इन 6 आरोपियों का पहलू खान की हत्या से कोई लेना-देना नहीं था। गौर करने की बात यह भी है कि जांच रिपोर्ट में 9 अन्य को आरोपित बनाया गया है, इनमें दो नाबालिग हैं।

जानिए क्या था पूरा मामला?

दरअसल, राजस्थान के अलवर के बहरोड़ थाना क्षेत्र में कथित गोरक्षकों की भीड़ द्वारा गाय लेकर जा रहे मुस्लिम समुदाय के 15 लोगों पर किए गए हमले में बुरी तरह जख्मी 55 वर्षीय पहलू खान नाम की मौत हो गई थी। मेवात जिले के नूंह तहसील के जयसिंहपुर गांव के रहने वाले पहलू खान एक अप्रैल को अपने दो बेटों और पांच अन्य लोगों के साथ जब गाय खरीदकर लौट रहे थे, तब राजस्थान के बहरोड़ में कथित गोरक्षों ने गो-तस्करी का आरोप लगाकर उन लोगों की जमकर पिटाई की।

भीड़ के हमले में अन्य लोगों के साथ बुरी तरह से पिटाई के शिकार हुए 55 साल के पहलू खान ने 3 अप्रैल को अस्पताल में दम तोड़ दिया। जबकि, बाद में मिले दस्तावेजों से साफ होता है कि उनके पास गाय ले जाने के दस्तावेज भी थे। इन रसीदों में इन लोगों द्वारा जयपुर नगर निगम और दूसरे विभागों को चुकाए गए पैसों की रसीद है, जिसके तहत वे कानूनी रूप से गायों को ले जाने का हक रखते थे।

हैरानी की बात यह थी कि, गोरक्षा के नाम भीड़ कुछ लोगों को मारती रही और पुलिस वहीं खड़ी होकर तमाशा देखती रही। वहीं, राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने इस मामले में विवादित बयान देते हुए कहा था कि ‘गोरक्षकों’ ने अच्छा काम किया, लेकिन लोगों की पिटाई कर उन्होंने कानून का उल्लंघन भी किया।

 

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