पेटीएम के साथ गुप्त समझौते पर केजरीवाल ने मोदी पर साधा निशाना, आज तक ने डिलीट किया ट्वीट

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गुरूवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पुछा है कि ई-काॅमर्स कंपनी पेटीएम के साथ हुए गुप्त समझौते का क्या रहस्य है? उन्होंने ट्वीट कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पेटीएम को सर्वाधिक लाभ मिला, घोषणा के बाद अखबारों के फ्रंटपेज पर पेटीएम कम्पनी प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करती नज़र आ रही है। इसके पीछे क्या डील है श्रीमान प्रधानमंत्री?

केजरीवाल ने इस बात का संज्ञान आजतक की वेबसाइट से लिया था जिसका शीर्षक था, ‘रिलायंस जियो के नक्शे कदम पर पेटीएम’, ऐड में छपवाई पीएम मोदी की तस्वीर। इस खबर के हवाले से बताया गया कि पेटीएम ने प्रधानमंत्री मोदी धन्यवाद किया है 500 और 1000 के नोटों के बंद किए जाने पर एक बड़ी सी तस्वीर के साथ। ये बिल्कुल ऐसा ही जैसा पिछले दिनों रिलायंस ने जियो के विज्ञापन में पीएम मोदी दिखाया था। आजतक की इस खबर के अनुसार पेटीएम रिलांयस जिओं के नक्शेकदम पर चल रहा है वैसे ही मोदी की तस्वीर छापकर।

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जैसे ही केजरीवाल ने इस खबर को ट्वीट किया, आजतक ने इसे डिलीट कर दिया, और खबर में बताया गया कि मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए किया है। केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट में कहा ये बेहद शर्मनाक है कि प्राईवेट कम्पनियां अपने प्रधानमंत्री को इस तरह से इस्तेमाल करती है। अगर ये गलत है तो कौन इनके खिलाफ कारवाई करेगा?

आपको बता दे कि पेटीएम ई-काॅमर्स की देश की एक बड़ी कंपनी है जो भारत में मोबाइल व अन्य बिलों के भुगतान की सेवाएं देती है। मोदी के भाषण के कुछ घंटे बाद ही इस कंपनी ने राष्ट्रीय समाचार पत्रों में फ्रंटपेज का ऐड बुक करा लिया था। लोगों को इस बात पर हैरानी है कि मोदी का भाषण रात 9:30 बजे तक समाप्त हुआ और अखबार मुख्य खबरों के लिए वो पेज रखते है कैसे वो पेज मोदी के धन्यवाद के विज्ञापन को दे दिया?

जबकि इस पर दिल्ली सरकार के मंत्री सतेन्द्र जैन ने ट्वीट किया और पुछा कैसे पेटीएम कंपनी इतनी जल्दी अखबारों में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल कर सकती है। क्या उसे प्रधानमंत्री कार्यालय से इसकी अनुमति मिली थी।

इसके बाद आप समर्थक कपिल ने अपने ट्वीट में कहा कि पेटीएम को सरकार के इस निर्णय का पहले से ही कैसे पता था, जो न्यूजपेपर में पहले ही ऐड बुक करा रखा था?

पीएम मोदी के इस फैसले के बाद से मध्यम वर्गीय लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मध्यम वर्ग जिनका कालेधन से कोई सरोकार नहीं उस पर ही इसकी मार पड़ी है। अचानक लिए इस फैसले के बाद लोगों पर विकल्प के तौर पर कोई समाधान ही नहीं था। पार्टी सर्मथकों में मोदी के इस फैसले पर खुशी की लहर दिखी जबकि विपक्ष द्वारा इसकी कड़ी आलोचना की जा रही है, और इस फैसले को एक आपदा बताया जा रहा हैं।

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