गुजरात सरकार का 10% आरक्षण गरीबो के साथ एक भद्दा मजाक है

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आशीष अग्रवाल

गुजरात सरकार ने संभवत: पटेल आरक्षण की मांग से बढ़ रही गर्मी से बचने के लिए आज 10% आरक्षण का एलान किया। यह आरक्षण केवल अनारक्षित समुदाय के लोगो के लिए ही उपलब्ध होगा। यह एक अच्छी बात हे की गुजरात सरकार ने काफी हद तक गरीबो की सहायता करने के लिए एक अच्छा कदम उठाया हे, परन्तु इस आरक्षण के लिए गुजरात सरकार ने गरीबो की परिभाषा ऐसी बदल डाली की अब तो सभी लोगो को खुद को गरीब ही कहना पड़ेगा

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औसतन एक अच्छी IT जॉब का शुरुबाती पैकेज 5 लाख रूपए का होता हे, मगर गुजरात सरकार का मनना हे की 6 लाख से काम कमाने वाले सभी लोग गरीबो की श्रेणी से सम्बन्ध रखते हे. जी हां गुजरात सरकार ने इस बदलाव के साथ अनारक्षित गरीब समुदाय के साथ एक भद्दा मजाक किया हे

यह भी एक सच्चाई हे की जादातर लोग जो मध्यवर्गीय परिवारों से सम्बन्ध रखते हे वो 6 लाख रूपए सालाना ही कमाते हे और जिन्हे सच में आरक्षण की जरूरत हे वो लोग 2 लाख रूपए भी मुश्किल से कमा पाते हे! तो अब गुजरात सरकार के अनुसार 6 लाख कमाने वाले की भी वही हैसियत हे जो की 2 लाख कमाने वाले की हे.

आष्चर्य की बात यह की सरकार ने लोगो को बेकफूफ बनाने की सारी हदे तब पार कर दी जब पता चला की यह 10% आरक्षण; अनारक्षित लोगो के हिस्से में से दिया जाएगा। ऐसा समझ सकते हे की एक घर में दस सदस्य हे और और उनमे से 8 की आय 6 लाख रूपए से कम हे, तो गुजरात सरकार यह कह रही हे की उन 8 में से हमने 2 लोगो की सीट आरक्षित कर दी – मगर सरकार ने यह नहीं बताया की वो 2 लोग कोन हे, वो दो लोग 2 लाख कमाने वाले भी हो सकते हे और 6 लाख कमाने वाले भी.

इसी के साथ आरक्षण बढ़ के 60% (50% आरक्षित + 10% अनारक्षित) कर दिया गया हे अब इससे उन लोगो को भी बहुत मुश्किल होगी जो किसी भी आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते, क्यूंकि जो 60% आरक्षित लोग हे वो आरक्षण भरने पे अनारक्षित लोगो के साथ हिस्सा लेंगे।

अक्सर देखा गया हे की जो लोग आरक्षण के साथ अपनी शिक्षा पूरी करते हे उन्हें सरकारी नोकरी तो आसानी से मिल जाती हे मगर प्राइवेट में धक्के खाने पड़ते हे! हो सकता हे की इस फैसले से जरूरतमंदों को और ज्यादा मुस्किल का सामना करना पड़े.

हमारे सविंधान निर्माताओं ने यह सोचा था की जत्तिगत आरक्षण को आजादी के 10 -20 साल बाद खत्म कर आय के दिया जाएगा, परन्तु सभी पार्टी के नेताओं ने इसे संभवत अपने स्वार्थ के लिए चालु रखा. जरुरी हे की गुजरात सरकार माननीय उच्च निर्देशालय के निर्देश अनुसार आरक्षण को 50% से अधिक न बढ़ाये और गरीबो की पहचान ढंग से करे.

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