पूर्व सैनिक राम किशन की आत्महत्या पर रक्षा मंत्रालय की सफाई, कहा- बैंक की गड़बड़ी की वजह से नहीं पहुंचा राम किशन को पैसा

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मंगलवार की शाम ओआरओपी की मांग को पूरा ना किए जाने पर पूर्व सैनिक राम किशन ने आत्महत्या कर ली। जिसका सीधा जिम्मेदार मोदी सरकार को माना जा रहा है।
पीएम मोदी ओआरओपी के वादे को पूरा किये जाने की घोषणा दिवाली पर सैनिको के एक कार्यक्रम में भी की थी लेकिन स्थितियां वहीं रहीं जिसके चलते एक पूर्व सैनिक को ऐसा कदम उठाना पड़ा।
इस पर अब रक्षा मंत्रालय सफाई देता हुआ नज़र आ रहा है। मंत्रालय सारा जिम्मा बैंक की गलती बताकर अपना पल्ला झाड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ज्ञात हो कि ग्रेवाल ने टेरीटोरियल आर्मी में छह साल 11 महीने सेवा दी, जिसके बाद वह रक्षा सुरक्षा कोर में रहे। वह ओआरओपी के हकदार थे।
जनसत्ता की खबर के अनुसार मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि ओआरओपी के तहत ग्रेवाल को पूरा लाभ नहीं मिला था, उन्हें थोड़ी कम रकम मिली थी। इसमें हरियाणा भिवानी जिले में एसबीआई बैंक की ब्रांच ने कैल्कुलेशन में गड़बड़ कर दी थी। मंत्रालय का कहना है कि संशोधित पेंशन हासिल करने में देर बैंक में जोड़ घटाव में समस्या आने के चलते हुई।
इसके अलावा मंत्रालय बेहूदा तर्क देते हुए कहता है कि उन्हें पूर्व सैनिक कल्याण प्रकोष्ठ से संपर्क करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि यदि उन्होंने सीधे मंत्रालय का रूख किया होता तो उनके मामले का हल भी सैकड़ों अन्य की तरह सौहार्दपूर्ण तरीके से हो जाता।
सरकार इस बात को ऐसे परोस रही है जैसे मंत्रालय से बात करते हुए आश्वासन की बजाय नतीजे पर बात हो जाती। इसके अलावा सरकार का प्रयास ये बन रहा है कि मृतक आत्महत्या को हत्या की साजिश करार दे दिया जाए।
प्राप्त खबर के अनुसार मंत्रालय का कहना है कि 31 अक्तूबर की तारीख वाला उनका पत्र और एक नवंबर को उनकी आत्महत्या ने कई सवाल खड़े किए हैं। इस बारे में गंभीर जांच किए जाने की जरूरत है कि मृतक के साथ कौन था, जब उन्होंने यह कठोर कदम उठाया। किसने उन्हें जहर मुहैया किया और क्या किसी ने उनकी मनोदशा का फायदा उठाकर इस कदम के लिए उन्हें उकसाया था।
सरकारों के लिए ये बेहद आसान है कि वो किसी आत्महत्या को हत्या में बदल दे। यदी सरकार ओआरओपी के अपने वादे पर खरी उतर जाती तो किसी रामकिशन को आत्महत्या करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

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