‘पेड न्यूज’ प्रकाशित करने के कारण 20 से ज्‍यादा अखबारों पर DAVP ने कसा शिकंजा, सरकारी विज्ञापनों पर लगी रोक

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केंद्र सरकार के सरकारी विज्ञापनों की नोडल एजेंसी विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (DAVP) ने 20 से ज्यादा अखबारों को अपने पैनल से दो महीने के लिए हटा दिया है। इन्हें ‘पेड न्यूज’ प्रकाशित करने के कारण हटाया गया है।
पेड न्यूज

निदेशालय की तरफ से जारी परामर्श में बताया गया कि पैनल में शामिल नहीं रहे करीब 30 से ज्यादा अखबारों को इस अवधि के दौरान पैनल में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि इन प्रकाशनों को इस अवधि के लिए केंद्र सरकार के विज्ञापन नहीं मिलेंगे।

भारतीय प्रेस परिषद् (PCI) ने विभिन्न कारणों से 52 अखबारों की निंदा की जिनमें अधिकतर के खिलाफ ‘पेड न्यूज’ के लिए निंदा की गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कदम उठाया गया है।

(DAVP) के निदेशक आर सी जोशी ने परामर्श जारी कर बताया, ‘जो प्रकाशन पैनल में हैं उन्हें दो महीने (13 सितम्बर 2017 से 12 नवम्बर 2017) के लिए हटाया गया है।’

भाषा की खबर के अनुसार उन्होंने कहा कि डीएवीपी के महानिदेशक ने यह भी निर्णय किया है कि जो प्रकाशन पैनल में नहीं थे और जिनकी पीसीआई ने निंदा की है उन्हें इस अवधि के दौरान पैनल में शामिल नहीं किया जाएगा।

इन 52 अखबारों में से 37 की पीसीआई ने ‘पेड न्यूज’ के लिए निंदा की है, तीन की पत्रकारीय नियमों का उल्लंघन करने और एक की ‘आपत्तिजनक’ फोटो छापने के लिए निंदा भी की है।

आपको बता दे कि पिछले दिनों हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा पेड न्यूज मामले में अयोग्य ठहराये गए मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा की उम्मीदवारी को टाल दिया था।

आपको बता दे कि पेड न्यूज पर बात करने वाली एक किताब को पिछले दिनों पाठ्यक्रम से हटा दिया गया था। देश के प्रख्यात मीडिया इंस्टिट्यूट ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के मीडिया पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया था। यहां पढ़ाई जाने वाली दिलीप मंडल की पुस्तक ‘मीडिया का अंडरवर्ल्ड’ को पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया था। बताया जा रहा है संस्थान की विविधता खत्म करने और एक विशेष विचारधारा को थोपने के उद्देश्य से पाठ्यक्रम में छटनी शुरू कर दी गई थी। इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की किताब ‘मीडिया का अंडरवर्ल्ड’ को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया था।

पत्रकार दिलीप मंडल ने फेसबुक वाल से अपनी बात को रखा है। उन्होंनें इस बारे में लिखते हुए कहा है कि…शर्मनाक!

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), जिसे पत्रकारिता ट्रेनिंग का देश का सबसे बड़ा संस्थान कहा जाता है, ने अपने सिलेबस से मेरी किताब “मीडिया का अंडरवर्ल्ड” को हटा दिया है।

यह किताब काफी समय से वहां और और कई संस्थानों की रीडिंग्स में शामिल हैं। यहां आप देश सकते हैं कि पिछले साल तक यह किताब IIMC के सिलेबस का हिस्सा रही है। पेड न्यूज पर भारत की यह अकेली किताब है। इस किताब को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मीडिया क्षेत्र में देश के सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार दिया है। खुद मंत्री आए थे पुरस्कार देने। इसके लिए मुझे 75,000 रुपए भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने दिए हैं।

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