‘पद्मावती’ विवाद पर शशि थरूर ने कहा, फिल्म की बजाए राजस्थानी महिलाओं की साक्षरता पर दें ध्यान

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निर्देशक संजय लीला भंसाली की आगामी फिल्म ‘पद्मावती’ 1 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है, लेकिन फिल्म को लेकर विवाद जारी है। वहीं दूसरी ओर आलोचना करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार(14 नवंबर) को कहा कि फिल्म पर विवाद राजस्थानी महिलाओं की स्थिति पर ध्यान देने का एक मौका है और शिक्षा ‘घूंघट’ या सिर पर पर्दे से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

शशि थरूर
फाइल फोटो- कांग्रेस सांसद शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा कि, ‘पद्मावती’ विवाद आज राजस्थानी महिलाओं की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने का एक मौका है, न कि छह शताब्दी पुरानी महारानियों पर ध्यान केंद्रित करने का राजस्थान की महिला साक्षरता दर सबसे कम है, शिक्षा ‘घूंघट’ से ज्यादा जरूरी है।

फिल्म के विषय के कारण कुछ समूह इसका विरोध कर रहे हैं। खासकर राजपूत मुख्य रूप से दावा कर रहे हैं कि फिल्म इतिहास को बिगाड़ रही है और रानी पद्मावती का गलत चित्रण कर रही है, जबकि भंसाली ने इससे इनकार किया है।

वहीं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र में केंद्रीय बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) सलाहकार समिति के सदस्य और भाजपा नेता अर्जुन गुप्ता ने कहा है कि भंसाली को देशद्राेह के लिए दंडित किया जाना चाहिए।

बता दें कि इस फिल्म में दीपिका पादुकोण रानी ‘पद्मावती’ का रोल निभा रही हैं। उनके अलावा फिल्म में रणवीर सिंह और शाहिद कपूर भी मुख्य भूमिका में हैं। ‘पद्मावती’ फिल्म एक दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।

बता दें कि, कुछ दिनों पहले ही गुजरात में एक कलाकार ने आरोप लगाया था कि दीपिका पादुकोण की पद्मावती रंगोली को भीड़ ने अपने पैरों से उसे ध्वस्त कर दिया था, जिसे बनाने में पूरे 48 घंटे का समय लगा था।

बता दें कि इस फिल्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। इस याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने अब तक सर्टिफिकेट नहीं दिया है। फिलहाल इस फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड फैसला करेगी, सेंसर बोर्ड के फैसले के बाद ही सुप्रीम कोर्ट इसपर कोई फैसला लेगी।

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