भारत-चीन सीमा विवाद: पी चिदंबरम ने पीएम मोदी के बयान पर उठाए सवाल, पूछा- क्या प्रधानमंत्री ने चीन को क्लीन चिट दे दी

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पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर शनिवार को सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री ने चीन को क्लीन चिट दे दी है।

पी चिदंबरम
file photo

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सीमा में कोई विदेशी (मतलब चीनी) नहीं है। अगर यह सही है तो पांच-छह मई को क्या हुआ? पिछले दिनों दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष क्यों हुआ? भारत ने अपने 20 जवानों क्यों खोए?’’

पूर्व गृह मंत्री ने यह सवाल भी किया, ‘‘अगर चीनी सैनिकों ने कोई घुसपैठ नहीं की है तो फिर छह जून को कोर कमांडर स्तर की बैठक क्यों हुई थी? क्या यह बैठक मौसम के बारे में हुई थी? अगर कोई चीनी सैनिक ने एलएसी पार नहीं किया तो फिर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान में पूर्व यथास्थिति की बहाली की बात क्यों हुई?’’

उन्होंने यह भी पूछा, ‘‘क्या प्रधानमंत्री ने चीन को क्लिन चिट दिया है? अगर ऐसा है तो फिर चीन से बातचीत क्यों? मेजर जनरल बातचीत क्यों कर रहे हैं और किस बारे में बात कर रहे हैं?’’

गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन तनाव पर शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कहा कि न कोई हमारे क्षेत्र में घुसा और न ही किसी ने हमारी चौकी पर कब्जा किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘एक तरफ सेना को जरूरी कदम उठाने के लिए आजादी प्रदान की गई है, वहीं भारत ने कूटनीतिक तरीकों से चीन को अपने रुख से स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है।’’

प्रधानमंत्री ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों को लेकर बुलाई गई इस बैठक के अंत में कहा कि चीन ने जो किया है उससे पूरा देश आहत और आक्रोशित है। पीएम मोदी ने चीन के साथ छह सप्ताह से सीमा पर बने गतिरोध की स्थिति से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के नेताओं को जानकारी दी।

गौरतलब है कि, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात को चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए। नाथुला में 1967 में टकराव के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच यह सबसे बड़ी झड़प है। उस समय भारत के लगभग 80 सैनिक शहीद हुए थे जबकि चीन की सेना के तीन सौ से अधिक सैनिक मारे गए थे। (इंपुट: भाषा के साथ)

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