फर्जी TRP केस: अर्नब गोस्वामी को बड़ा झटका, रिपब्लिक मीडिया और न्यूज नेशन के मालिकों को मुंबई पुलिस ने बनाया आरोपी; दाखिल की 1,400 पन्नों की चार्जशीट

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फर्जी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स (टीआरपी) रैकेट में मुंबई पुलिस की तरफ से आरोपी बनाए जाने के बाद विवादों में घिरे अंग्रेजी समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के विवादास्पद एंकर और संस्थापक अर्नब गोस्वामी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस बीच, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने टीआरपी रैकेट मामले में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और न्यूज नेशन सहित 6 चैनलों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

रिपब्लिक मीडिया

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सोमवार को कथित तौर पर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और न्यूज नेशन सहित 6 चैनलों के फर्जी टेलीविन रेटिंग प्वाइंट्स (टीआरपी) मामले में 1,400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इन सभी चैनलों पर दो साल से पैसे देकर टीआरपी बढ़ाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और न्यूज नेशन के मालिकों को पुलिस ने वांटेड बनाया है। पुलिस ने कहा कि उन्हें सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया जा सकता है। पुलिस ने आरोप लगाया था कि कुछ चैनल टीआरपी बढ़वाने के लिए रिश्वत दे रहे हैं ताकि उनकी विज्ञापन से होने वाली कमाई बढ़ सके।

यह चार्जशीट मुंबई पुलिस द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष एक सीलबंद कवर में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने से एक दिन पहले दाखिल की है। हाई कोर्ट रिपब्लिक मीडिया द्वारा एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें उन्होने चैनल के खिलाफ की गई एफआईआर को खारिज करने की मांग की है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जांच कर रहे क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) के असिस्टेंट इंस्पेक्टर सचिन वज़े ने कहा, “टीआरपी को बढ़ाने के लिए पैसे देने के अलावा, हमने पाया है कि रिपब्लिक नेटवर्क ने ड्यूल लॉजिकल चैनल नंबर (LCN) की मदद ली थी। एलसीएन का उपयोग करने से पता चलता है कि एक विशेष चैनल न केवल समाचार चैनल अनुभाग में लोगों द्वारा देखा जा रहा था, बल्कि बच्चों के अनुभाग में भी चैनल को देखा जा रहा था। इसकी टीआरपी दो फ़्रिक्वेंसी में दिखाई दे रही थी, जिसके चलते टीआरपी तेजी से बढ़ रही थी।”

उन्होंने कहा, यह ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि, इस मामले में वे केबल ऑपरेटरों की भूमिका की भी जांच करेंगे।

मामले में आरोपित 12 लोगों में से पांच हंसा रिसर्च ग्रुप के कर्मचारी भी शामिल है। न्यूज चैनलों के मालिक और एक रिपब्लिक मीडिया कर्मचारी- सहायक उपाध्यक्ष (वितरण) घनश्याम सिंह, वर्तमान में सलाखों के पीछे हैं। करीब 140 गवाहों के बयान चार्जशीट में संलग्न किए गए हैं।

यह कथित फर्जी टीआरपी घोटाला तब सामने आया जब रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने हंसा रिसर्च ग्रुप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई कि कुछ चैनल विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने के लिए टीआरपी अंक के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। आरोपी है कि दर्शक संबंधी आंकड़े के संग्रहण के लिए जिन परिवारों में मीटर लगाये गये थे और उनमें से कुछ को कुछ खास चैनल देखने के लिए रिश्वत दी जाती थी।

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