जेटली बोले- बैंकों में रखे जनता के पैसे पर कोई आंच नहीं, लेकिन FRDI बिल का विरोध जारी, जानिए क्यों सरकार के इस विधेयक से लोग क्यों डरे हुए हैं?

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सरकार की ओर से प्रस्तावित फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल- 2017 में शामिल एक मसौदे को लेकर जमाकर्ताओं की चिंताओं को दूर करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार (11 दिसंबर) को कहा है कि सरकार वित्तीय संस्थानों में आम लोगों की जमा राशि की पूरी तरह रक्षा करेगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रस्तावित वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक में बदलाव को लेकर खुला रुख अपनाने का संकेत दिया।2K notesजेटली ने कहा कि बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये डालने की सरकार की योजना का उद्देश्य बैंकों को मजबूत बनाना है और किसी बैंक के विफल होने का कोई सवाल नहीं है। अगर ऐसी कोई स्थिति आती भी है तो सरकार ग्राहकों की जमाओं की पूरी रक्षा करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि, ‘इस बारे में सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है।’ जेटली ने यह टिप्पणी FRDI बिल के एक प्रावधान को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की चिंताओं को दूर करने के प्रयास में दी है।

इस विधेयक को इस साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था। यह इस समय संयुक्त संसदीय समिति के पास विचाराधीन है। कुछ विशेषज्ञों ने विधेयक के मसौदे में वित्तीय संस्थानों के लिए संकट से उबने के लिए बेल-इन यानी आंतरिक संसाधनों का सहारा के प्रावधान को बचत खातों के रूप में ग्राहकों की जमाओं को संभावित नुकसान वाला करार दिया है।

जेटली ने कहा कि, ‘यह विधेयक संसद की संयुक्त समिति के समक्ष है। समिति की जो भी सिफारिशें होंगी, सरकार उन पर विचार करेगी।’ उन्होंने कहा कि विधेयक के प्रावधानों को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। मंत्री ने कहा कि, ‘सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है और कह चुकी है कि वह सार्वजनिक बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को मजबूत बनाने को प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक बैंको को मजबूत बनाने के लिए उनमें 2.11 लाख करोड़ रुपये लगाए जा रहे हैं।’

आखिर क्या है इस बिल में?

दरअसल बैंकों के दिवालिया होने की स्थ‍िति में उन्हें सहारा देने के लिए फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) विधेयक लाया जा रहा है। इस बिल के मुताबिक जब भी कोई बैंक अपना कारोबार करने में सक्षम नहीं होगा और वह अपने पास जमा आम लोगों के पैसे लौटा नहीं पाएगा, तो एफआरडीआई बिल बैंक को इस संकट से उभारने में मदद करेगा। इसके तहत एक ऐसे कॉर्पोरेशन की स्थापना की बात कही गई है जिसके पास वित्तीय फर्म को संपत्तियों के ट्रांसफर, विलय या एकीकरण, दिवालियापन आदि से संबंधित कई अधिकार होंगे।

‘बेल-इन’ को लेकर हो रहा है विरोध

दरअसल, आशंका जताई जा रही है कि इस बिल से कथित तौर पर बैंकों को संकट के समय लोगों के जमा धन को इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाएगी। लोगों की सबसे बड़ी श‍िकायत कानून के ‘बेल-इन’ के मसौदे को लेकर है। बेल-इन का मतलब है कि अपने नुकसान की भरपाई कर्जदारों और जमाकर्ताओं की जेब से करना। इस विधेयक में यह प्रस्ताव आने से बैंकों को भी यह अधिकार मिल जाएगा।

‘बेल इन’ कथित तौर पर बैंको को यह अध‍िकार दे देगा कि वह जमाकर्ता का पैसा अपनी खराब स्थ‍िति को सुधारने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी जब बैंकों को लगेगा कि वे संकट में हैं और उन्हें इसकी भरपाई करने की जरूरत है, तो वह आम आदमी के जमा पैसों का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे। इतना ही नहीं इसके तहत बैंकों को एक खास अधिकार मिल जाएगा, जिसमें बैंक अगर चाहे तो खराब वित्तीय स्थ‍िति का हवाला देकर आपके पैसे को लौटाने से इनकार कर सकते हैं।

बिल के खिलाफ ऑनलाइन याचिका दायर

इस बिल के खिलाफ मुंबई की शिल्पा श्री द्वारा Change.org पर एक ऑनलाइन याचिका डाली गई है। इसके द्वारा बैंकों की खराब हालत पर उन्हें उबारने के लिए लोगों के जमा धन का इस्तेमाल नहीं करने की बात कही जा रही है। इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक गौर करने वाली बात यह है कि यह खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह तेजी से फैल रही है और अब तक याचिका पर 70 हजार से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं।

याचिका में कहा गया है कि, ‘यह बिल सरकारी संस्था को अधिकार देता है कि वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे बैंक को बचाने के लिए जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल कर सके। भले ही आपने अपनी गाढ़ी कमाई जमा की हो पर सरकारी संस्था यह घोषणा कर सकती है कि बैंक की ओर से आपको कोई पैसा नहीं दिया जाना है। हां! यह हमारे उस पैसे के साथ होगा, जो हमने अपने बच्चों और भविष्य के लिए बचाकर रखा है। इसीलिए, मैंने यह याचिका डाली है और हम वित्त मंत्री अरुण जेटली से FRDI बिल में से ‘बेल-इन’ के प्रावधान को हटाने की मांग कर रहे हैं।’

 

 

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