मोदी सरकार के 3 साल के दौरान धर्म-जाति के नाम पर हिंसा की घटनाओं में 41 फीसदी की हुई बढ़ोतरी

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केंद्र की मोदी सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान सांप्रदायिक घटनाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल नजर आ रही है। जी हां, यह विपक्ष नहीं बल्कि खुद मोदी सरकार ने आंकड़ा जारी कर अपनी इन नाकामी को देश के सामने रखी है। मंगलवार(25 जुलाई) को सरकार ने लोक सभा में जानकारी दी कि पिछले तीन सालों में सांप्रदायिक, जातीय और नस्ली हिंसा को बढ़ावा देने वाली घटनाओं में 41 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है।

Saharanpur
फाइल फोटो।

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री गंगाराम अहिरवार ने खुद सदन में यह रिपोर्ट पेश किया। उन्होंने इस बारे में सदन को जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 में धर्म, नस्ल या जन्मस्थान को लेकर हुए विभिन्न समुदायों में हुई हिंसा की 336 घटनाएं हुई थीं।

वहीं, साल 2016 में ऐसी घटनाओं की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई और यह आंकड़ा बढ़कर 475 हो गई। अहिरवार कथित गोरक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा और सरकार द्वारा उन पर रोक लगाने से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
अहिरवार ने लोकसभा को बताया कि सरकार के पास गोरक्षकों से जुड़ी हिंसा का आंकड़ा नहीं है, लेकिन सांप्रदायिक, जातीय या नस्ली विद्वेष को बढ़ाने वाली हिंसक घटनाओं का आंकड़ा मौजूद है।

आपको बता दें कि विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि मोदी सरकार के आने के बाद सांप्रदायिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन सरकार अभी तक ऐसे लोगों पर लगाम लगाने में विफल रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ऐसे लोगों पर राज्य सरकारों से कार्रवाई करने का निर्देश दे चुके हैं, लेकिन उनके निर्देश का अभी भी कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

राज्यों में 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी

गृह राज्य मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्यों में ऐसी घटनाओं में 49 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 में राज्यों में 318 ऐसी घटनाएं हुई थीं, जो साल 2016 में बढ़कर 474 हो गईं। हालांकि, दिल्ली समेत सभी केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसी घटनाओं में भारी की कमी आई है। राजधानी और केंद्र शासित प्रदेशों में साल 2014 में ऐसी हिंसा की 18 घटनाएं हुई थीं, लेकिन साल 2016 में ऐसी केवल एक घटना हुई।

यूपी में सबसे तेजी से हुई बढ़ोतरी

मंत्री अहिरवार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक, जातीय और नस्ली विभेद को बढ़ावा देने वाली हिंसक घटनाओं में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यूपी में तीन सालों में ऐसी घटनाएं 346 प्रतिशत बढ़ीं। साल 2014 में यूपी में ऐसी 26 घटनाएं हुई थीं तो साल 2016 में ऐसी 116 घटनाएं हुईं।

बता दें कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूर्व की सपा सरकार को निशाने पर लेने वाली बीजेपी की अपनी सरकार के समय कई जातीय एवं सांप्रदायिक संघर्ष हुए। अब तक के कार्यकाल के दौरान योगी सरकार कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष करती हुई दिखाई दी।

अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं में हुई इजाफा

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में साल 2014 में ऐसी केवल चार घटनाएं हुई थीं, लेकिन साल 2016 में राज्य में ऐसी 22 घटनाएं हुईं। यानी उत्तराखंड में ऐसी घटनाओं में 450 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि, पश्चिम बंगाल में साल 2014 में ऐसी हिंसा की 20 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं साल 2016 में 165 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ ऐसी 53 घटनाएं दर्ज हुईं।

जबकि मध्य प्रदेश में 2014 में पांच तो 2016 में 26 ऐसी घटनाएं हुई थीं। हरियाणा में 2014 में तीन और 2016 में 16 ऐसी घटनाएं हुई थीं। बिहार में साल 2014 में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी, लेकिन 2016 में ऐसी आठ घटनाएं हुईं।

 

 

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