नोटबंदी के बाद जन धन खातों में आए काले धन की रकम पर आयकर विभाग कसेगा शिकंजा

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नोटबंदी के बाद जनधन खाता काफी चर्चा में आया है। जो आंकड़े आए हैं, वे चकराने वाले हैं। नौ नवंबर तक इन खातों में जमाराशि थी- 45 हजार, 627 करोड, जो 30 नवंबर को 74 हजार, 322 करोड़ हो गई। जिस खाते में एक पैसा नहीं था या चंद रुपये थे, ऐसे अनेक खातों में 49 हजार रुपये जमा हो गए।

आयकर विभाग
Income Tax Department

अगर जन धन अकाउंट में बड़ी रकम करने वाला शख्स उसके बारे में सफाई देने की स्थिति में नहीं है। तो सरकार का कहना है कि ‘अगर खातों में बड़े डिपॉजिट किए गए हैं और उनके सोर्स के बारे में पूछे जाने पर खाताधारक ठीक से नहीं बता पाता है तो इससे माना जाएगा कि बैंक खाते का दुरुपयोग हुआ है।’

सरकार ने लोगों से कहा है कि वे काला धन रखने वालों को अपने जनधन खातों का दुरुपयोग ना करने दें। उन्होंने कहा कि जनधन खातों में जमा रकम में अचानक बढ़ोतरी की जांच से कई गड़बड़ियों का पता चला है। उन खातों में काला धन जमा होने की आशंका पर टैक्स अथॉरिटीज ने उनमें जमा रकम की जांच की थी।

लाइव मिंट की खबर के अनुसार तीस नवंबर तक जनधन खातों में जमाराशि 74,321.55 करोड़ थी जबकि 8 नवंबर की नोटबंदी के बाद इसमें करीब 28,685 करोड़ की बढ़ोत्तरी हुई है और 23 नवंबर से 30 नवंबर के बीच 1,487 करोड़ की राशि जमा हो गई।

हालिया डेटा के मुताबिक जन धन खातों में जमा रकम में 29000 करोड़ रुपये का तेज उछाल आया है और जीरो बैलेंस एकाउंट की संख्या में भारी गिरावट आई है। एक अनुमान के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में संभवत: 10 लाख करोड़ रुपये की नकदी 500 रुपये और 1000 रुपये की करेंसी की शक्ल में वापस आ गई है।

काले धन को सफेद करने के प्रयास सिर्फ जनधन खातों के जरिए नहीं हुई। पेट्रोल पंपों, गैस एजंसियों, गन्ना मिलों, सार्वजनिक परिवहन के कर्मचारियों आदि ने भी इसमें बहुत हद तक लोगों की मदद की। उनकी पहचान का क्या उपाय है। नोटबंदी के जरिए पचासी फीसद से अधिक मुद्रा को चलन से बाहर कर दिया गया, उसमें से कितने की पहचान काले धन के रूप में हो पाएगी। यह कह पाना मुश्किल है।

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