‘आप’ को पंजाब में चुनाव जीताने के लिए मैदान में उतरी अप्रवासी भारतीयों की टीम

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पंजाब चुनाव इस बार पहले से अधिक रोचक परिणाम देने वाला होगा। इस बार पंजाब से पहली बार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी मैदान में होगी।

पंजाब
Photo: The Indian Express

कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल के लिए आम आदमी पार्टी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इसके लिए ‘आप’ ने हर मोर्च पर अपनी तैयारियां दुरस्त कर ली है। भारी संख्या में अप्रवासी भारतीय आप को चुनाव जीताने की खातिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का साथ देने पंजाब में आ रहे है।

पार्टी का दावा है कि पंजाब से विदेशों में जाकर बसे 2,500 अप्रवासी भारतीय उन्हें वोट दिलवाने के लिए लौटे हैं, और वे इस बात के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि उनके गृहराज्य की कमान इस बार ‘आप’ को ही मिले। ऐसे ही एक शख्स हैं हैरी धालीवाल, जिन्होंने लुधियाना में जनसभाएं करने की खातिर क्यूबा में परिवार के साथ छुट्टियां मनाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

वह कहते हैं 37 साल पहले, मुझे अपना मुल्क छोड़ना पड़ा था क्योंकि जो मूल्य मैंने यहां सीखे और अपनाए उनके बदले सिस्टम ने कभी कुछ नहीं दिया। लेकिन जब कनाडा जाकर वही मूल्य मैंने खेत मज़दूर के रूप में अपनाए मैं वहां आखिरकार एक जज बन सका।

पूर्व लोेकसभा चुनाव में पंजाब से आम आदमी पार्टी ने 4 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया था इस कारण से भी पंजाब में इस बार आप की दावेदारी और भी बढ़ जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘आप’ को अपनी कुल फंडिंग का 20 फीसदी से ज़्यादा हिस्सा अप्रवासी भारतीयों से ही मिलता है और उन्होंने ‘चलो पंजाब’ कैम्पेन शुरू किया है, जिसमें वे अप्रवासी भारतीयों से न सिर्फ अपने पैसे पार्टी के लिए खर्च करने का आग्रह करते हैं बल्कि अपना समय देने का भी अनुरोध करते हैं।

जबकि इस बारें में पार्टी प्रवक्ता आशुतोष ने लिखा है कि आज जब पंजाब और गोवा चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं, सैकड़ों अप्रवासी भारतीय वॉलंटियरों ने छुट्टियां ले ली हैं, और पार्टी के लिए प्रचार करने की खातिर इन दोनों राज्यों में मौजूद हैं। या तो उन लोगों ने अपनी पसंद से चुनाव क्षेत्र चुन लिए हैं, या उन्हें हमने किसी एक चुनाव क्षेत्र की ज़िम्मेदारी सौंप दी है।

जो अप्रवासी भारतीय हमारे साथ काम कर रहे हैं, उनमें युवतियां और युवक भी हैं, और अधेड़ उम्र के भारतीय भी, जो हिन्दुस्तान के हालात से उकता चुके हैं, और व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।

बीते दिनों पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद और दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने एक ट्विट के जरिए कहा था कि पार्टी के पास चुनाव लड़ने के रिसोर्सिस की कमी है जिसके बाद कई एनआरआई पार्टी के सपोर्ट में चंडीगढ़ वापिस लौटे।

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