उत्तर प्रदेश: सपा-बसपा के बाद अब गठबंधन के तीसरे साथी रालोद भी लड़ेगा विधानसभा उपचुनाव

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आपसी गठबंधन को फिलहाल ‘होल्ड’ पर रखने के बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ऐलान के तुरंत बाद ही समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को अपनी राहें अलग करने के संकेत दे दिए। आने वाले विधानसभा उपचुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरेंगी। इस बीच गठबंधन की तीसरी सहयोगी पार्टी रालोद ने भी अकेले ही चुनाव मैदान में उतरने का मन बना लिया है।

ईद से ऐन एक दिन पहले सपा-बसपा-रालोद गठबंधन बिखरने के बीच, गठबंधन के तीसरे घटक रालोद ने बुधवार को कहा कि वह उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा उपचुनाव लड़ेगा। साथ ही रालोद ने उम्मीद जताई कि गठबंधन बना रहेगा। बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले बने सपा-बसपा गठबंधन के फिलहाल खत्म होने के संकेत देते हुए दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों पर होने वाले संभावित उपचुनाव को अपने बलबूते लड़ने की मंगलवार को घोषणा कर दी।

रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि राष्ट्रीय लोक दल एक राजनीतिक दल है और हम उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में मैदान में उतरेंगे। हालांकि, प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। जहां तक प्रत्याशियों के चयन की बात है तो यह फैसला हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व- चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी करेंगे।

राज्य के नए राजनीतिक हालात में रालोद की भूमिका के बारे में पूछने पर अहमद ने कहा कि रालोद समाजवादी पार्टी के साथ रहा है और हमें अखिलेश यादव के कोटे से सीटें मिली थीं। उन्होंने कहा कि हमारी इच्छा है कि गठबंधन एकजुट रहे और मजबूत रहे। वस्तुतः कांग्रेस को भी गठबंधन का हिस्सा होना चाहिए था। एक सवाल के जवाब में अहमद ने कहा कि नफा नुकसान के बारे में विश्लेषण बाद में किया जाएगा। हमारी इच्छा है कि गठबंधन अपना कुनबा बढ़ाए ताकि हम भाजपा के खिलाफ एक मजबूत ताकत बनकर उभर सकें।

इस सवाल पर कि रालोद कौन-कौन सी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा, अहमद ने फैसला पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर छोड़ते हुए कहा कि आने वाले कुछ दिनों में राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक के दौरान इस मामले पर चर्चा होगी। रालोद के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पार्टी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपनी उपस्थिति महसूस कराने का मौका मिलेगा।

हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में रालोद तीन सीटों पर लड़ी थी, लेकिन उसके प्रत्याशी किसी भी सीट पर विजयी नहीं हुए। रालोद प्रमुख अजीत सिंह मुजफ्फरनगर से, उनके बेटे जयंत चौधरी बागपत से और कुंवर नरेंद्र सिंह मथुरा से चुनाव हार गए। उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनाव में रालोद ने 277 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसके 266 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

मायावती के बाद अखिलेश ने भी दिए गठबंधन से अलग होने का संकेत

बता दें कि आपसी गठबंधन को फिलहाल ‘होल्ड’ पर रखने के बसपा प्रमुख मायावती के ऐलान के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को अपनी राहें अलग करने के संकेत दे दिए। अखिलेश ने गाजीपुर में कहा, ‘अगर गठबंधन टूटा है और जो बातें कही गई हैं … मैं उन पर बहुत सोच समझकर विचार करूंगा। जब उपचुनाव में गठबंधन है ही नहीं, तो सपा भी 11 सीटों पर राय मशविरा करके अकेले चुनाव लड़ेगी। अगर रास्ते अलग-अलग हैं तो उसका भी स्वागत है।’ पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान बसपा प्रमुख मायावती द्वारा सपा के साथ गठबंधन को फिलहाल रोकने के निर्णय के मद्देनजर खासे मायने रखता है।

मालूम हो कि बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को नई दिल्ली में लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के लिये होने वाले उपचुनाव अपने दम पर लड़ने का निर्णय लिया था। उसके बाद सपा-बसपा गठबंधन टूटने की अटकलें तेज हो गई थीं। मायावती ने मंगलवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में सपा का ‘आधार वोट’ यानी यादव समाज अपनी बहुलता वाली सीटों पर भी सपा के साथ पूरी मजबूती से टिका नहीं रह सका। उसने भीतरघात किया और यादव बहुल सीटों पर सपा के मजबूत उम्मीदवारों को भी हरा दिया। (इनपुट- भाषा के साथ)

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