‘मी टू’ की तर्ज पर अब पुरुषों ने भी शुरू किया ‘मैन टू’ अभियान, पुरुष करेंगे महिलाओं के हाथों हुए यौन शोषण का खुलासा

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देश भर में चल रहे ‘मी टू’ (#MeToo) अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) के तहत हर रोज चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अमेरिका से शुरू हुए ‘मीटू’ आंदोलन ने भारत में भी भूचाल मचा दिया है। इस बीच अब यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की आवाज बुलंद करने की मुहिम ‘मी टू’ की तर्ज पर अब पुरुषों ने भी ‘मैन टू’ (#ManToo) अभियान शुरू कर दिया है। पुरुषों ने महिलाओं के हाथों हुए यौन शोषण का खुलासा करने के लिए ‘मैन टू’ अभियान शुरू किया है।

साल 2017 में यौन उत्पीड़न के केस में निचली अदालत से बरी हो चुके एक पूर्व फ्रांसीसी राजनयिक समेत 15 लोगों के एक समूह ने यह अभियान लांच करते हुए पुरुषों से अपील की है कि वे महिलाओं द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के बारे में खुलकर बोलें। आंदोलन की शुरुआत शनिवार को गैर सरकारी संगठन चिल्ड्रंस राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पेरेंटिंग (क्रिस्प) ने की।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, क्रिस्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार वी ने कहा कि समूह लैंगिक तटस्थ कानूनों के लिए लड़ेगा। उन्होंने मांग की कि मीटू अभियान के तहत झूठे मामले दायर करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। यह उल्लेख करते हुए कि मीटू एक अच्छा आंदोलन है, उन्होंने हालांकि कहा कि झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

कुमार ने कहा, ‘इस आंदोलन का परिणाम समाज में बड़ी मेहनत से अर्जित लोगों के सम्मान को धूमिल करने के रूप में निकला है।’ पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मीटू में जहां पीड़िताएं दशकों पहले हुए यौन उत्पीड़न की बात बता रही हैं, वहीं इसके विपरीत मैन टू आंदोलन में हालिया घटनाओं को उठाया जाएगा। मीटू आंदोलन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि यौन उत्पीड़न का मामला सच्चा है तो पीड़िताओं को सोशल मीडिया पर आने की जगह कानूनी कार्रवाई का सहारा लेना चाहिए।

इस मौके पर फ्रांस के पूर्व राजनयिक पास्कल मजूरियर भी मौजूद थे, जिन पर अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था, लेकिन 2017 में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। उन्होंने कहा कि मैन टू आंदोलन मीटू आंदोलन का जवाब देने के लिए नहीं है, बल्कि यह पुरुषों की समस्याओं का समाधान करेगा जो महिलाओं के अत्याचारों के खिलाफ नहीं बोलते हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘पुरुषों के पास असली दुख हैं। वे भी पीड़ित हैं, लेकिन वे महिलाओं और अपने दुराचारियों के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाते हैं। यह अच्छा है, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि मानवता का आधा हिस्सा पुरुष हैं।’ आपको बता दें कि पास्कल अदालती लड़ाई का सामना कर रहे हैं क्योंकि उनकी पत्नी उन्हें बरी करने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट चली गई थीं। फ्रांस के पूर्व राजनयिक की पत्नी के पास उनके तीन बच्चों का संरक्षण है।

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