सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकार की आलोचना करने पर देशद्रोह या मानहानि का मुक़दमा नहीं बनता

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सरकारों की आलोचना करने पर देशद्रोह या मानहानि का मुकादमा नहीं लगाया जा सकता।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और न्यायमूर्ति यु यु ललित की खंडपीठ ने बिलकुल साफ़ सन्देश में कहा, “अगर कोई शख्स सरकार की आलोचना में कोई बयान दे रहा है हो तो उसे देशद्रोह या मानहानि के क़ानून के अंतर्गत अपराध नहीं माना जा सकता। हम ने बिलकुल साफ़ कर दिया है कि क़ानून की दफा 124 (A) लगाने से पहले कुछ गाइडलाइन्स को पूरा करना पड़ता है जैसा की सुप्रीम कोर्ट के एक पहले के आदेश में कहा गया था। ”

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सुप्रीम कोर्ट की ये टिपण्णी वकील प्रशांत भूषण की उस शिकायत की सुनवाई के दौरान आयी जिसमे उन्होंने कहा था कि देशद्रोह एक बहुत ही गंभीर अपराध है जिसका सरकारें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने केलिए इस्तेमाल कर रही हैं।

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भूषण जो एक NGO की पैरवी कर रहे थे ने कहा की जिन लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुक़दमा दायर किया गया था उनमें कुडनकुलम नुक्लेअर प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोग और कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी को केंद्र की मोदी सर्कार केलिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में सरकार का विरोध या इसकी आलोचना करने वालों के खिलाफ देशद्रोह का मुक़दमा लगाए जाने के कई मामले सामने आये हैं।

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इनमें जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके साथियों के नाम विशेष हैं जिन्हें कुछ दिनों तक तिहाड़ जेल में भी समय गुज़ारना पड़ा था।

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  1. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, प्रजातन्तर व बोलने के अधिकार की सुरक्षा के लिये बहुत महत्व पुर्ण है, इस अमर का फैसला पहिले भी हो चुका था,किन्तु सरकार के फैसले की परर्वाह न करके देश द्रोह के केंश केन्दर सरकार व राज्य सरकारें, आलोचना व अधिकारों की माँग करने वालें व्यक्तियों पर लगातार केश करने से बाज़ नही आ रही हैं, इस पर निचली अदालतों को गाइड- लाईन जारी की जावें,केश करने वाली एजैन्सी पर कोर्ट प्रोसिडिंग्स का खर्च व मुआवज़ा लगाया जावें,ताकि गैरकानूनी हिरासत में रहने के कारण निर्दोष व्यक्ति को हर्ज़ाना मिल सके।

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