CBI ने सिसोदिया के घर रेड से किया इनकार, AAP ने लगाया- छापेमारी का आरोप

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दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर शुक्रवार(16 जून) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) किसी मामले को लेकर पूछताछ करने पहुंची है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ‘टॉक टू AK’ कार्यक्रम के सिलसिले में लगे कथित आरोपों की प्राथमिक जांच के सिलसिले में सिसोदिया का बयान लेने पहुंची है।

फाइल फोटो।

वहीं, आम आदमी पार्टी(AAP) ने इसे छापेमारी बता रही है। लेकिन सीबीआई ने इसे रेड मानने से इनकार कर दिया है। सीबीआई ने साफ किया कि यह छापेमारी नहीं है, बल्कि मात्र सिसोदिया का बयान दर्ज कराने पहुंचे हैं। सीबीआई ने कहा कि वो सिसोदिया के घर पर किसी तरह का छापा नहीं मार रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि वह पहले से चल रही एक जांच से जुड़े मामले में उपमुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण लेने आई है। हालांकि, सीबीआई ने ये नहीं बताया कि वो किसी मामले में स्पष्टीकरण लेने आई है। AAP ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसे सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी बताया है।

आप ने ट्वीट कर लिखा, ‘मनीष सिसोदिया पर CBI के छापे पड़ रहे हैं क्योंकि वो दिन-रात सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाने में लगे हैं।’ वहीं, सिसोदिया के मीडिया सलाहकार अरुंदोय प्रकाश ने ट्वीट कर कहा कि एक ओर जहां सीएम अरविंद केजरीवाल अस्पतालों की जांच कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीबीआई ने उपमुख्यमंत्री के घर रेड मार दी है।

क्या है ‘टॉक टू एके’ का पूरा मामला?

NDTV ने दावा किया है कि सिसोदिया से सीबीआई “टॉक टू एके” से जुड़े मामले में ही पूछताछ करने पहुंची है। आपको बता दें कि इसी साल सीबीआई ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सोशल मीडिया अभियान ‘टॉक टू AK’ में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीबीआई ने सिसोदिया के खिलाफ एक प्रारंभिक जांच दर्ज की थी।

दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग की शिकायत पर प्रारंभिक जांच दर्ज की गई है। मनीष सिसोदिया पर आम आदमी पार्टी सरकार के सोशल मीडिया कैंपेन ‘टॉक टू एके’ से जुड़े नियमों के उल्‍लंघन का आरोप है। आरोप यह है कि नियमों को ताक पर रखकर एक कंपनी को इस कार्यक्रम के प्रचार का ठेका दिया गया। दिल्ली सरकार के प्रचार विभाग के प्रमुख भी मनीष सिसोदिया ही हैं।

साथ ही वित्त मंत्री का कार्यभार भी सिसोदिया ही संभाल रहे हैं। इस कार्यक्रम में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आया था। आरोप है कि प्रधान सचिव की आपत्तियों के बावजूद सरकार ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया और सलाहकार ने पैसे को खर्च किया। इस मामले में दिल्ली सरकार के प्रचार विभाग सूचना एवं प्रचार निदेशालय के दफ्तर पर सीबीआई ने छापेमारी की थी।

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