सुषमा स्वराज बोलीं- ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक में कोई पाकिस्तानी सैनिक या नागरिक नहीं मारा गया’

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विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने गुरुवार (18 अप्रैल) को कहा कि फरवरी में पुलवामा आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए हवाई हमले (एयर स्ट्राइक) में किसी भी पाकिस्तानी सैनिक या नागरिक की मौत नहीं हुई। अहमदाबाद में महिला पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने 2014 की तरह पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार पर जोर दिया और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जो चाहते थे वह नहीं कर पाए, क्योंकि वह गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे।

File Photo: TOI

बता दें कि भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट इलाके में जैश ए मोहम्मद के एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान मारे गए थे। सुषमा स्वराज ने कहा कि एयर स्ट्राइक आत्मरक्षा में किया गया था।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘पुलवामा हमले के बाद जब हमने सीमा पार हवाई हमला किया तो हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताया कि हमने केवल आत्म रक्षा में ऐसा कदम उठाया है।’’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा था कि सशस्त्र बलों को निर्देश दिया गया था कि हमले में किसी भी पाकिस्तानी नागरिक या सैनिक को नुकसान नहीं हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सेना को कहा गया था कि केवल जैश ए मोहम्मद के आतंकी शिविरों को निशाना बनाए जिसने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी।’’

स्वराज ने कहा कि सेना को केवल जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी कैंप को निशाना बनाने के लिए कहा गया था। इसी आतंकी संगठन ने पुलवामा हमले की जवाबदेही ली थी। हमारी सेना ने ऐसा ही किया। उन्होंने कहा कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एयर स्ट्राइक पर भारत का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि वह एक शीर्ष अंतरराष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे हैं। उन्होंने दुनिया के लिए एजेंडा तय किया है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत का ऐसा स्पष्ट रुख इससे पहले नहीं था। 2008 के मुंबई आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार दुनिया में पाकिस्तान को अलग-थलग में विफल रही थी। हमले में 14 देशों के 40 विदेशी नागरिकों के मारे जाने के बावजूद तत्कालीन सरकार ठोस कदम नहीं उठा सकी थी।

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