मानसून सत्रः मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्‍वास प्रस्‍ताव गिरा, समर्थन में 126 वोट पड़े जबकि विरोध में 325

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के पहला अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। लोकसभा में सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार (20 जुलाई) रात 11 बजे मत विभाजन के बाद गिर गया। मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 126 वोट पड़े, जबकि विरोध में 325 मत पड़े। हालांकि शिवसेना का वोटिंग से दूर रहना मोदी सरकार के लिए चिंता की बात रही। प्रस्ताव पर वोटिंग के बाद लोकसभा की कार्रवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इस तरह लोकसभा में बुधवार को लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को मतदान के बाद गिर गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो सांसद के. सी. पटेल और भोला सिंह बीमार थे, लेकिन वे मतदान के लिए संसद पहुंचे। वहीं सांसद पप्पू यादव ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और मतदान से पहले सदन से बहिर्गमन किया।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था और कहा था कि चर्चा और वोटिंग शुक्रवार को होगी। बता दें कि यह प्रस्ताव आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर टीडीपी लेकर आई थी। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों के सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।

तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के केसिनेनी श्रीनिवास पहले सांसद थे, जिन्होंने अविश्वास नोटिस दिया और उनसे इस प्रस्ताव को रखने के लिए कहा। प्रस्ताव को कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और माकपा के 50 सांसदों का समर्थन था।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि उन्हें इस मामले में सभी नोटिस को एक समय में एक साथ लेना चाहिए था। खड़गे और श्रीनिवास के अलावा कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तारिक अनवर, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन.के. प्रेमचंद्रन और तेदेपा के थोटा नरसिम्हन ने भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया था।

पीएम मोदी ने साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्षी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले चार साल में देश में हुए विकास के इतने कार्यों के बावजूद ‘‘अहंकार’’ के कारण अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें सवा सौ करोड़ देशवासियों ने चुना है और ‘‘यहां से कोई न उठा सकता है, न बैठा सकता है।’’ उन्होंने अपने संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर विशेष निशाना साधा। उन्होंने शुक्रवार सुबह राहुल गांधी द्वारा अपने पास आकर गले मिलने के घटनाक्रम का जिक्र किया और कहा, ‘‘उनका एक ही मकसद है मोदी हटाओ। मैं हैरान हूं कि सुबह चर्चा शुरू हुई थी, मतदान भी नहीं हुआ था, जय पराजय का फैसला भी नहीं हुआ लेकिन उन्हें यहां पहुंचने का इतना उत्साह है कि आकर (मुझसे) बोले, उठो उठो।’’

मोदी ने कहा, ‘‘यहां कोई न उठा सकता है, न बैठा सकता है। सवा सौ करोड़ देशवासी उठा सकते हैं। इतनी जल्दबाजी क्या है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनका एक ही मकसद है, मैं ही प्रधानमंत्री बनूंगा। इसके लिए कम से कम अविश्वास प्रस्ताव का बहाना तो न बनाइए।’’ पीएम ने कहा, ‘‘अहंकार ही कहता है कि हम खड़े होंगे तो प्रधानमंत्री 15 मिनट तक खड़े नहीं हो पाएंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं खड़ा भी हूं और चार साल जो काम किये हैं, उस पर अड़ा भी हूं।’’

तेदेपा और कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा सरकार के खिलाफ लाये गये पहले अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लोकतंत्र की महत्वपूर्ण शक्ति का परिचायक है। भले ही यह तेदेपा के माध्यम से आया हो लेकिन उनके साथ जुड़े हुए कुछ अन्य सदस्यों ने भी इसके समर्थन में बात कही है तो एक बड़े वर्ग ने इसके विरोध में कुछ बात कही हैं। उन्होंने सभी सदस्यों से इस प्रस्ताव को खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत से बनी सरकार ने पिछले चार साल में जिस गति से काम किया है, उसके काम पर विश्वास जताएं।

मोदी ने कहा कि इससे हमें अपनी बात करने का मौका तो मिल ही रहा है, साथ ही देश को देखने को मिल रहा है कि विपक्ष में कैसी नकारात्मकता है, विकास के प्रति कितनी नकारात्मक सोच है। ‘‘उन सबका चेहरा निखरकर सजधज कर बाहर आया है।’’ उन्होंने कहा कि कभी तो लगता है कि आज उनके (विपक्षी दलों के) सारे भाषण, उनका व्यवहार अज्ञानवश नहीं है। यह झूठे आत्मविश्वास के कारण भी नहीं। ‘‘अहंकार इस प्रकार की प्रवृत्ति के लिए खींच लाया।’’ मोदी ने कहा कि विपक्ष को हमारे इतने सारे विकास कार्यों, योजनाओं पर विश्वास नहीं है।

राफेल सौदे को लेकर राहुल के बयान के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दो जिम्मेदार सरकारों के बीच सौदा है, दो कारोबारी पार्टियों के बीच नहीं। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के मुद्दे पर तो ‘‘यह बचकाना रवैया’’ नहीं अपनाएं। मोदी ने कहा कि हम यहां इसलिए हैं कि हमारे पास संख्याबल है। हम यहां इसलिए हैं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद हमारे साथ है। उन्होंने अपने भाषण में यह कविता भी कही, ‘‘न माझी, न रहबर, न हक में हवाएं, है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है’’

 

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