सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, अब दहेज प्रताड़ना के मामले में ससुराल पक्ष की तुरंत नहीं होगी गिरफ्तारी

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अब दहेज प्रताड़ना मामले में पति या ससुराल पक्ष के लोगों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। दहेज प्रताड़ना यानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498 ए के दुरुपयोग से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार(27 जुलाई) को यह अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने नाराज पत्नियों द्वारा अपने पति के खिलाफ दहेज-रोकथाम कानून का दुरुपयोग किए जाने पर चिंता जाहिर करते हुए निर्देश दिए कि इस मामले में आरोप की पुष्टि हो जाने तक कोई गिरफ्तारी ना की जाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार(27 जुलाई) को दहेज प्रताड़ना मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस इस मामले में किसी व्यक्ति को तबतक गिरफ्तार नहीं कर सकती, जबतक जिले में स्थित परिवार कल्याण समिति संबंधित मामले में अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करता।

इसके साथ ही गुरुवार को दहेज प्रताड़ना निरोधक कानून की धारा 498ए के हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कई और व्यापक दिशानिर्देश जारी किए। अब दहेज प्रताड़ना के मामले पुलिस के पास न जाकर एक मोहल्ला कमेटी (सिविल सोसायटी) के पास जाएंगे, जो उस पर अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही पुलिस देखेगी कि कार्रवाई की जाए या नहीं।

जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने यूपी के एक मामले में दिए फैसले में कहा कि धारा 498ए को कानून में रखने का (1983 संशोधन) मकसद पत्नी को पति या उसके परिजनों के हाथों होने वाले अत्याचार से बचाना था। वह भी तब जब ऐसी प्रताड़ना के कारण पत्नी की आत्महत्या करने की आशंका हो। लेकिन धारा 498ए के तहत बड़ी संख्या में मामले दर्ज करवाए जा रहे हैं।

साथ ही अदालत ने कहा कि धारा-498 ए के तहत पुलिस या मेजिस्ट्रेट तक पहुंचने वाली शिकायतों को इस तरह की समिति के पास रेफर कर दिया जाना चाहिए। एक महीने में समिति को रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट आने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। रिपोर्ट पर जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट मेरिट के आधार पर विचार करेंगे।

कोर्ट ने माना कि कई पत्नियां आईपीसी की धारा 498ए का दुरुपयोग करते हुए पति के माता-पिता, नाबालिग बच्चों, भाई-बहन और दादा-दादी समेत रिश्तेदारों पर भी आपराधिक केस कर देती हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि महिला घायल होती है या फिर उसकी मौत होती है तो यह नियम लागू नहीं होंगे।

 

 

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