केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला, अब राशन के लिए ‘आधार कार्ड’ नहीं होगा अनिवार्य

1

जहां एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार विभिन्न सामाजिक सेवा योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया में लगी हुई है। वहीं दूसरी ओर दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए राशन के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म कर दी है। इसका मतलब अब दिल्ली के लोगों को राशन वितरित करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा।

आधार कार्ड
file photo

एजेंसी के हवाले से एबीपी न्यूज़ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में एक मोबाइल बाइक एंबुलेंस योजना की शुरुआत के लिए एक पायलट योजना को भी मंजूरी दी। अपने आवास पर आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि राशन योजना पर यह फैसला इसलिए किया गया क्योंकि कई लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था।

उन्होंने कहा कि, ‘कुछ महीने पहले दिल्ली कैबिनेट ने राशन की चोरी रोकने का फैसला किया था, लेकिन कैबिनेट ने पहले जो फैसला किया था, उसे कुछ अलग ही तरीके से अधिकारियों ने लागू किया।’ सिसोदिया ने आगे कहा कि, ‘इसलिए हमने आधार कार्ड के जरिए राशन वितरण की इजाजत देने के पुराने फैसले को फिलहाल रोक कर रखने का फैसला किया है। अभी कुछ समय के लिए पुरानी व्यवस्था से ही काम चलेगा, आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा।’

एबीपी न्यूज़ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने शिरकत नहीं की, क्योंकि ऐसे आरोप लग रहे हैं कि ‘आप’ के कुछ विधायकों ने मुख्य सचिव पर कथित हमला किया। सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में पायलट आधार पर शुरू की जाने वाली मोबाइल बाइक एंबुलेंस सेवा को भी मंगलवार को मंजूरी दी गई। पूर्वी दिल्ली में ऐसी 16 बाइकें चलाई जाएंगी। इसका मकसद ऐसे इलाकों के लोगों को मेडिकल मदद पहुंचाना है जहां गलियां काफी तंग हैं और चार पहिया वाले एंबुलेंस नहीं जा सकते। यह सारी बाइकें जीपीएस से लैस होंगी।

बता दें कि, अभी कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई और गुजरात फेयर प्राइस शॉप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रह्लाद मोदी ने राशन कार्ड को आधार के साथ लिंक करने के मुद्दे को उठाया था। प्रह्लाद मोदी ने कहा था कि, राशन कार्ड को आधार से लिंक कराने के चलते बहुतों को राशन ही नहीं मिल पा रहा है, साथ ही इस मामले पर उन्होंने राज्य सरकार को अड़े हाथों लिया था।

प्रह्लाद मोदी ने कहा था कि, राशन कार्ड को आधार से लिंक कराने के चलते बहुतों को राशन ही नहीं मिल पा रहा है। प्रह्लाद मोदी का ये भी कहना है कि राशन डीलरों को भी इससे तकलीफ हो रही है। पीएम मोदी के भाई ने गुजरात सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री जयेश रादडिया से मुलाकात कर उन्हें इस परेशानी की बात बताई थी।

 

 

1 COMMENT

  1. फ़रवरी 20, 2018
    सत्यमेव जयते…
    gulabkothari @ 7:00
    https://gulabkothari.wordpress.com/2018/02/20/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B5-%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A5%87/
    इस देश में सत्य की जीत स्वयं में एक उत्सव है। राज्य विधानसभा में सोमवार को की गई यह घोषणा कि सरकार काले कानून बनने वाले विधेयक को प्रवर समिति से वापस लेती है, राज्य के लिए ऐतिहासिक अवसर है। पहली बधाई जनता जनार्दन को। उसने जब दिया दिल खोलकर दिया और जब छीना तो समय रहते अलवर और अजमेर में दिखा दिया।
    दूसरी बधाई पत्रिका के कर्णधार चि. निहार और चि. सिद्धार्थ को, उनकी पूरी टीम को। मैंने तो अपनी ओर से एक मौन सत्याग्रह शुरू करके सरकार से संघर्ष का श्रीगणेश कर दिया। खतरे तो इन लोगों को ही उठाने पड़े। हां, आज श्रद्धेय बाबूसा (कुलिश जी) स्वर्ग से भी इनको आशीष दे रहे होंगे। जहां मीडिया पैसे में बिक रहा है, इन्होंने अपने हौसले को बनाए रखा और मुझे भी आश्वस्त करते रहे।
    तीसरी बधाई राज्य सरकार को, स्वयं मुख्यमंत्री राजे को, जिन्होंने अपने अहंकार पर लगी चोट को भूल हंसते हुए अपना कदम वापस लिया। उम्मीद करनी चाहिए कि आने वाले समय में कुछ बदलेगा। इस कानून को बनने से रोककर सरकार ने संविधान और लोकतंत्र के प्रति सम्मान ही जताया है।
    एक बड़ा तथ्य सामने जो आया, वह गंभीर है। अध्यादेश छह सितम्बर २०१७ को जारी हुआ था। २३ अक्टूबर २०१७ को दण्ड प्रक्रिया संहिता राजस्थान संशोधन विधेयक २०१७ के रूप में विधानसभा में रखा गया था और उसी दिन प्रवर समिति को भी सौंप दिया गया था। पिछले पांच महीनों में किसी को भी इस विधेयक की आंच महसूस ही नहीं हुई। इसी सत्र में प्रवर समिति का कार्यकाल ६ माह बढ़ा दिया गया। विपक्ष चाहता तो बड़ा आन्दोलन खड़ा कर सकता था। सत्ता पक्ष के इतने सारे विधायक और सब मौन (घनश्याम तिवाड़ी के अलावा)। क्या होगा उनके दिलों पर जो इस विधेयक को प्रासंगिक बता रहे थे। क्या इन सबके व्यवहार को देखकर लोकतंत्र की आत्मा इनको नहीं कचोटेगी? सबने जनता को धता बताकर अपने-अपने स्वार्थ साध लिए।
    आज विधानसभा में १९ जुलाई सन् १९७७ का राज्यपाल का वक्तव्य सुनाया, वह इस काले अध्यादेश पर भी हूबहू लागू होता है। उसे दोहराना भी उपयुक्त ही होगा। ‘आपातकालीन स्थिति देश के इतिहास में एक काला पृष्ठ है। एक व्यक्ति को सत्ता में बनाए रखने के लिए सारे देश को भयंकर उत्पीडऩ सहना पड़ा। हजारों लोग अकारण ही जेलों में डाल दिए गए। गिरफ्तारी व यातनाओं से एवं समाचार प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाकर देश में भय का वातावरण उत्पन्न किया गया।
    व्यक्ति पूजा इस हद तक पहुंची कि देश को एक ही व्यक्ति का पर्याय समझा जाने लगा। न्यायपालिका के अधिकारों को सीमित कर दिया गया। यहां तक कि संसद में प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों के प्रकाशन पर भी रोक लगा दी गई। सत्ता के गैर संवैधानिक केन्द्रों द्वारा सत्ता का खुले आम दुरुपयोग किया गया। विरोधी दल के सम्मानित नेताओं के विरुद्ध झूठा एवं अनर्गल प्रचार निरन्तर चलता रहा।’
    प्रदेश के इतिहास का काला पृष्ठ बनने से रोक लेना जरूर जनहित में होगा। किन्तु गहराई से समझने की बात यह है कि क्या सरकार के इस प्रयास को जनता भी कभी भूल पाएगी? इसे भुलाना ही सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here