इससे पहले भी एक गुजराती प्रधानमंत्री ने बंद किए थे नोट

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ये एक अजब संयोग है कि देश में पहले भी नोटों पर बैन लगाया गया था और उस समय भी देश के प्रधानमंत्री एक गुजराती ही थे। पीएम मोदी केे 500 और 1000 के नोट पर बैन लगाने के प्रयोग को एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन अब से 38 साल पहले गुजरात के ही मोरार जी देसाई ने भी ऐसा ही कदम उठाया था और 1000, 5000 और 10,000 के नोट को बैन करने का फैसला लिया था। पीएम मोदी का यह प्रयोग पहली बार नहीं किया जा है।
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जबकि इस बात को इत्तेफाक माना जा रहा है कि मोदी और मोराजी दोनों ही गुजरात से ताल्लुक रखते है। इसके अलावा एक बात और दोनों के कार्यकाल में सामान मानी जा रही है कि मोरार जी देसाई के समय में आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल थे और इस बार पीएम मोदी के समय में उर्जित पटेल हैं। ये महज एक संयोग ही है।
आपको बता दे कि 2000 का नोट लाने वाले नरेंद्र मोदी देश के पहले पीएम माने जाएगें जबकि 1000 के नोट दोबारा अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वापस आए थे। 1000 के नोट के पीछे भी काले धन और उससे चल रही समांनतर अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए किया गया था और इस फैसले को हाई डेमोमिनेशन बैंक नोट ऐक्ट 1978 के तहत लाया गया था।
एनडीटीवी की खबर के अनुसार, इस कानून के तहत 16 जनवरी 1978 के बाद इन नोटों की मान्यता समाप्त कर दी गई। बड़ी कीमत वाले नोटों को ट्रांसफर या रिसीव करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके साथ ही सभी बैंकों और सरकारी संस्थानों को रिजर्व बैंक को अपने पास मौजूद बड़े नोटों की जानकारी देनी थी, जिन लोगों के पास ये बड़े नोट थे वे बैंक में जाकर 24 जनवरी 1978 तक इन नोटों को बदलवा सकते थे।
पीएम मोदी के इस बडे़ फैसले पर बोलते हुए उन्होंने मंगलवार रात देश को संदेश देते हुए कहा कि इसके कारण लोगों को कुछ परेशानियां पेश आयेंगी.. लेकिन मेरा आग्रह होगा कि देशहित में वे इन कठिनाइयों को नजरंदाज करेंगे।

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