जानिए क्यों नीतीश कुमार को अपने नए ‘बॉस’ की वजह से हजारों लोगों के सामने पीना पड़ा ‘अपमान का घूंट’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार(14 अक्टूबर) को पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे राजधानी पटना में थे। हालांकि पीएम के इस दौरे में कुछ नया नहीं था, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस दौरान अपने नए बॉस (मोदी) की वजह से हजारों लोगों के सामने दो-दो बार अपमानित होना पड़ा।

नीतीश
File Photo: AP

वैसे तो पीएम मोदी की अगवानी के लिए नीतीश कुमार गुलाब का फूल लेकर गये थे, लेकिन पूरे दिन उसके कांटे उन्हें चुभते रहे। इसकी शुरुआत पटना एयरपोर्ट से ही हो गई, जब मुख्यमंत्री वक्त से पहले ही वहां पहुंच गए और लाउंज में कुछ देर इंतजार करने के बाद पीएम को रिसीव करने जैसे ही निकले एसपीजी वालों ने उनकी कार रोक दी।

उस वक्त पटना एयरपोर्ट का माहौल बेहद गर्म हो गया। हालांकि वहां पर मौजूद बिहार सरकार और पुलिस के आला अधिकारियों के हस्‍तक्षेप के बाद कुछ मिनटों के अंदर फिर उनकी बुलेटप्रूफ कार को जाने दिया गया, लेकिन इस घटना से नीतीश कुमार भी काफी नाराज हुए।

हालांकि, बाद में दिल्ली फोन मिलाया गया। उसके बाद जब हेडक्वार्टर से आदेश मिला तब कहीं जाकर नीतीश कुमार की गाड़ी आगे बढ़ पाई। मामला शांत होने के बाद नीतीश कुमार ने हवाई अड्डे पहुंचकर पीएम मोदी और राज्यपाल सत्यपाल मलिक को रिसीव किया।

मुख्यमंत्री के साथ हुए इस अपमानजनकर व्यवहार पर बिहार पुलिस का कहना है कि जिला प्रशासन के लोगों के साथ भी एसपीजी के लोगों का रवैया ठीक नहीं था। पुलिस का कहना है कि एसपीजी के लोगों का बहुत बेरुखी वाला व्यवहार था।उधर एसपीजी अधिकारियों का कहना है कि जो अधिकारी एयरपोर्ट पर थे शायद उन्हें निर्णय और मुख्यमंत्री की गाड़ी के बारे में कुछ भ्रम था लेकिन इसे तुरंत ठीक कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सरकार के अधिकारियों का कहना है कि ये संयुक्त बैठक में साफ था कि हर बार की तरह मुख्यमंत्री टरमैक पर अपनी गाड़ी में जाएंगे और जैसा प्रोटकॉल में है, उसके अनुसार पहले कार्यक्रम के लिये सबसे पहले प्रस्थान कर जाएंगे। क्योंकि मुख्यमंत्री उस कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री और राज्यपाल दोनों को रिसीव भी करते हैं।

नीतीश कुमार को दूसरी बार पीना पड़ा ‘अपमान का घूंट’

नीतीश कुमार को उस समय एक बार फिर अपमान का घूंट पीना पड़ा जब पटना यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के उनके आग्रह को पीएम मोदी ने साफ अनसुना कर दिया। नीतीश ने बड़ी ही विनम्रता के साथ प्रधानमंत्री के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि, “पहली बार कोई प्रधानमंत्री इस यूनिवर्सिटी में आया है। मैं हाथ जोड़कर गुजारिश करता हूं कि इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दे दें। पटना यूनिवर्सिटी आपको 100 साल तक याद रखेगी।”

नीतीश कुमार ने जिस तरह से गुहार लगाई उस पर पत्थर का भी दिल होता तो पसीज जाता, लेकिन उनकी मांग को प्रधानमंत्री मोदी ने फौरन खारिज कर दिया। मोदी ने कहा कि, ‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक आग्रह रखा है और आप सभी ने इस पर तालियां भी बजायीं, लेकिन मैं मानता हूं कि ये बात पुरानी हो गयी है और मैं इसे एक कदम आगे ले जाना चाहता हूं।’

उन्होंने आगे समझाते हुए कहा कि ‘देश के 20 विश्वविद्यालयों (10 प्राइवेट, 10 पब्लिक) को विश्वस्तर का बनाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इन विश्वविद्यालयों का चयन योग्यता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालय से आगे की चीज है। मैं पटना विश्वविद्यालय को इसमें शामिल होने का निमंत्रण देता हूं।’

इस बात में कोई संदेह नहीं कि शायद नीतीश कुमार को इस बात का आभास नहीं रहा कि उनकी पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग को इतना घुमा फिराकर पीएम मोदी खारिज कर देंगे। लेकिन राजनीति के पंडितों का कहना है कि नीतीश कुमार को यह याद रखना चाहिए कि मोदी वह शख्स हैं जो अपने विरोधियों को कभी भूलते नहीं है।

पटना विश्‍वविद्यालय शताब्दी समारोह में शामिल होने के बाद भी पीएम का केंद्रीय विश्वविद्यालय देने की घोषणा नहीं करने से आने वाले समय राजनीतिक सरगर्मी बढ़ेगी। विपक्षी पार्टियां नीतीश कुमार पर हमलावर होगीं। क्योंकि नीतीश कुमार ने मंच से जिस प्रकार पीएम से आग्रह किया उसके बाद भी पीएम के घोषणा नहीं करने से नीतीश के लिए भी बचाव करना मुश्किल होगा।

बता दें कि इसी साल जुलाई महीने बिहार में महागठबंधन का साथ छोड़कर नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। महागठबंधन की सरकार से इस्तीफे के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ लेकर दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं, सुशील मोदी एक बार फिर बिहार के उप-मुख्यमंत्री बने हैं।

 

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