“2019 लोकसभा चुनाव में ‘खंडित जनादेश’ का इंतजार कर रहे हैं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी”

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केंद्र और राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी शिवसेना के सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि देश ‘खंडित जनादेश’ की तरफ बढ़ रहा है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ऐसी स्थिति का ‘इंतजार’ कर रहे हैं। बीजेपी के सहयोगी दल शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक राउत ने अखबार में अपने रविवारी आलेख में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कद घटा है, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कद बढ़ा है।

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File Photo: HT

पीटीआई के मुताबिक राउत ने कहा, ‘‘देश खंडित जनादेश की तरफ बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं।’’ उन्होंने कहा कि 2014 में मोदी को मिला पूर्ण बहुमत ‘बर्बाद गए मौके’ की तरह था। राउत ने लिखा था कि 2014 में मोदी के समर्थन में लहर थी, क्योंकि वोटरों ने तय कर लिया था कि कांग्रेस को हराना है, लेकिन ‘आज तस्वीर बदल गई है।’

शिवसेना सांसद ने कहा, ‘‘मोदी की छवि अब फीकी पड़ गई है। राहुल गांधी का नेतृत्व मोदी के जितना बड़ा नहीं है, लेकिन उसे अब अहमियत मिल रही है, क्योंकि लोग मौजूदा सरकार से निराश हैं।’’ राउत ने कहा, ‘‘बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता आगामी चुनावों में पार्टी के संभावित खराब प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं, लेकिन नितिन गडकरी के बयान इस बात के संकेत हैं कि हवा किस तरफ बह रही है। गडकरी जैसे नेता की आरएसएस और बीजेपी नेताओं के बीच बराबर स्वीकार्यता है।’’

उन्होंने दावा किया कि गडकरी को बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर दूसरा कार्यकाल नहीं मिले, इसके लिए ‘राजनीतिक साजिशें’ रची गईं थीं। बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना को परोक्ष रूप से चेतावनी देते हुए रविवार को कहा कि यदि गठबंधन होता है तो पार्टी अपने सहयोगी दलों की जीत सुनिश्चित करेगी और यदि ऐसा नहीं होता है तो पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में अपने पूर्व सहयोगियों को करारी शिकस्त देगी।

 

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  1. इन्होने पहले शेर की सवारी की और बहादुर कह लाये पर जब वही शेर उनपे हमला करने लगा तो अब ये लोग ये बात कह रहे है के जानवर की सवारी करो नाकि शेर की, सवर्णों ने जाती बनायीं अपने हिसाब से लागु भी किया और उसमे शूद्रों को कोई हक नहीं दिया उसमे गुलाम बना के रक्खा नीच कहा अपमानित किया शोषण किया बलात्कार किया और भी बुरे काम किये उनलोगो के साथ पर जब उनलोगो ने ये सब सहते हुए आंबेडकर की वजह से खुद को बेहतर साबित कर रहे है अपने हक के लिए लर रहे है तब ये जाती ख़तम करने की बात कर रहे है, दलित शब्द का प्रयोग माहि होगा ऐसा फरमान आया है मोदी के तरफ से, पहले दलित बोलके गली दिया जाता था पर अब जब लोग इस को अपना चुके है तो अब इस का इस्तेमाल नहीं होगा. सवर्णों की ज़मीन खिसक रही है तो अब ये सब को साथ लेके चलने की बात कर रहे है वही १०% आरक्षण सवर्णों को दे रहे है इससे से साफ़ है के ये कभी भी शूद्रों को बराबरी का अधिकार नहीं देना चाहते बस इस बारे में बात करेंगे और कुछ नहीं.

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