निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख दिनेंद्र दास ने रविशंकर के दावों को किया खारिज, बोले- ‘और कितना झूठ बोलेंगे’

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‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोर समर्थक रविशंकर द्वारा NDTV को दिए इंटरव्यू में किए गए दावों को निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख और कई दशकों पुराने अयोध्या विवाद के तीन में से एक पक्षकार महंत दिनेंद्र दास ने मंगलवार (6 मार्च) को खारिज कर दिया है। रविशंकर पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए ‘जनता का रिपोर्टर’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि रविशंकर ने उन्हें बैंगलुरु स्थिति ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के अपने आश्रम में खुद आमंत्रित किया था, ना कि हम अपनी तरफ से उनके पास गए थे।

दरअसल, रविशंकर ने सोमवार को टीवी इंटरव्यू में महंत दास का हवाला देते हुए दावा किया था कि सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा के महंत बैंगलुरु स्थित उनके आश्रम आए थे। वे इस मामले की शांतिपूर्ण समाधान चाहते थे। वे मस्जिद के निर्माण के लिए कुछ जमीन देने के लिए तैयार हैं।

एनडीटीवी के पत्रकार ने रविशंकर से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या निर्मोही अखाड़ा के महंत आपके पास आए थे या पहले आपने उनसे (निर्मोही अखाड़ा) संपर्क किया। इस सवाल पर रविशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि नहीं पहले वे (निर्मोही अखाड़ा) मेरे पास आए उसके बाद मैं उन लोगों के पास पहुंचने लगा। साथ ही रविशंकर ने एनडीटीवी से कहा कि निर्मोही अखाड़ा के लोगों द्वारा मुसलमानों को 5 एकड़ जमीन देने का वादा किया गया।

हालांकि ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख महंत दास ने कहा कि रविशंकर झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि “श्री श्री और कितना झूठ बोलेंगे? हमने 2.5 एकड़ जमीन के बारे में बात की थी, 5 एकड़ की नहीं। हमारे पास केवल 2.5 एकड़ जमीन उपलब्ध है। हम श्री राम के अनुयायी हैं। श्रीराम के अनुयायी खून-खराबे की बात नहीं करते। हमारा उद्देश्य हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए रहा है।”

उन्होंने कहा कि, “बेशक हम एक शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम अदालत के फैसले का पालन नहीं करेंगे, अगर हम अदालत के बाहर मामले को निपटाने में सफल नहीं होते हैं तो हम सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे।  उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद का ढांचा बरकरार था तब भी हम हमेशा इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहते थे। बेशक, वीएचपी और अन्य ने 1992 में ढांचा को ध्वस्त कर दिया, यह हमारी गलती थी।”

रविशंकर ने अयोध्या में मंदिर के पक्ष में फैसला न आने पर खून खराबे की दी चेतावनी

बता दें कि ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक रविशंकर इन दिनों अयोध्या विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं। इस बीच सोमवार (5 मार्च) को अयोध्या विवाद पर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर मामला नहीं सुलझा तो ‘भारत में सीरिया जैसे हालात हो जाएंगे’। साथ ही उन्होंने मंदिर के पक्ष में फैसला न आने पर खून खराबे की भी चेतावनी दे डाली। श्री श्री ने ये बातें अंग्रेजी समाचार चैनल इंडिया टुडे और एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू के दौरान कहीं।

रविशंकर का कहना है कि अगर अयोध्या में राम मंदिर विवाद नहीं सुलझा तो भारत सीरिया बन जाएगा। रविशंकर ने सोमवार को अयोध्या में मंदिर बनाने की वकालत करते हुए इंडिया टुडे से कहा कि, ‘मुस्लिमों को सद्भावना दिखाते हुए अयोध्या पर अपना दावा छोड़कर मिसाल पेश करनी चाहिए। अयोध्या मुस्लिमों की आस्था का स्थान नहीं है।’

रविशंकर ने कहा कि इस्लाम विवादित स्थल पर पूजा करने की अनुमति नहीं देता है। विवादित स्थल पर अस्पताल बनाने के प्रस्ताव को भी उन्होंने खारिज कर दिया। रविशंकर के मुताबिक फैसला अदालत से आया तो भी कोई भी पक्ष राजी नहीं होगा। अदालत के फैसले में एक पक्ष को हार माननी होगी। ऐसे में बवाल होने की आशंका है, जो समाज के लिए अच्छा नहीं है।

वहीं एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि, ”अगर कोर्ट कहता है कि ये जगह बाबरी मस्जिद है तो क्या लोग इस बात को आसानी और खुशी से मान लेंगे? 500 सालों से मंदिर की लड़ाई लड़ रहे बहुसंख्यकों के लिए कड़वी गोली की तरह होगी। ऐसी स्थिति में खून खराबा भी हो सकता है।”

उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाता है तो मुस्लिम हारा हुआ महसूस करेंगे। वो न्यायपालिका में अपनी यकीन खो सकते हैं। ऐसे में वो अतिवाद की तरफ बढ़ सकते हैं। हम शांति चाहते हैं। बता दें कि इससे पहले वाराणसी में रविशंकर ने कहा था ने कहा था कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं कुछ एकड़ जमीन के टुकड़े से कहीं बड़ी हैं।

क्या है सीरिया के हालात?

बता दें कि सीरिया में बशर अल-असाद सरकार द्वारा विद्रोहियों के खात्मे के नाम पर मासूम बच्चों के हो रहे कत्लेआम की तस्वीर देखकर पूरा विश्व विचलित है। सीरियाई सरकार द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों में मासूम बच्चों सहित 600 से अधिक बेगुनाह लोगों की मौत हो चुकी है। सीरिया सरकार के खिलाफ विश्वभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। सीरिया से बाहर आई मासूम बच्चों की कुछ तस्वीरों ने पूरी दुनिया का कलेजा छलनी कर दिया है।

मासूम बच्चों सहित बेगुनाह लोगों पर उनकी ही हुकूमत बम पर बम बरसा रही है। आसमान से बरसते इन बमों को बरसाने वालों के लिए इस बात के कोई मतलब या मायने नहीं है कि बम किनके सीने पर फट रहे हैं। मरने वाले अपने ही बेगुनाह लोग हैं, बेबस औरतें या मासूम बच्चे। उन्हें कोई फिक्र नहीं, क्योंकि सारी लड़ाई कुर्सी की है। विश्व समुदाय की आपत्ति के बावजूद भी सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद ने स्पष्ट कहा है कि बमबारी जारी रहेगी।

 

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