‘निर्भया गैंगरेप’ मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सबूतों पर गम्भीर संदेह

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निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र संजय हेगड़े ने शुक्रवार को एपेक्स कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में हेगड़े ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए उन सबूतों पर गंभीर संदेह जताया है, जिनके आधार पर चार दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी।

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इससे पहले, 2012 में हुए देश को झंकझोर देने वाले इस सनसनीखेज सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में दूसरे नंबर के न्यायमित्र रहे राजू रामचंद्रन की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट में दोषियों की मौत की सजा पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्रन ने यह निष्कर्ष निकाला था कि इस मामले में आरोपियों के लिए कोई निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई थी।

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मीडिया रिर्पोट के अनुसार, हेगड़े ने बताया कि यह संभव है कि केवल एक ही व्यक्ति ने अपराध किया हो और दूसरों को उसमें फंसाया गया हो। एपेक्स कोर्ट शनिवार को हेगड़े की उस रिपोर्ट पर भी सुनवाई करेगा, जिसमें उस दुर्भाग्यपूर्ण रात को हुई इस घटना को लेकर मौत से पहले के निर्भया के बयान और उसके पुरुष दोस्त के बयानों में कुछ विसंगतियों का जिक्र है।

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हेगड़े ने बताया, उदाहरण के लिए देखें तो, मृतका के दोस्त का बयान प्राथमिक महत्व का था, जो बेमेल है। अभियोजन पक्ष का केस मजबूत करने के लिए उसके बयान में सुधार किया गया था।

आपको बता दे कि न्यायमित्र एक विशेषज्ञ होता है और वह किसी भी मामले में कोई पार्टी नहीं होता है, लेकिन वह उसके द्वारा कोर्ट को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी के माध्यम से निष्पक्ष तरीके से न्याय करने में अदालत की सहायता करता है। हालांकि, न्यायमित्र की इस जानकारी को लेकर कोई भी निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर होता है।

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आपको बता दे कि अब से पूर्व सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने लिखित बहस में कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने सजा देने से पहले सजा सुनाए जाने के मूलभूत सिद्वांत, संवैधानिक गहराई और सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या के अनुसार वैधानिक प्रतिबिंबत नहीं है।

ज्ञात हो कि 16 दिसंबर,2012 की रात को हुए निर्भया गैंग रेप और हत्या के चार आरोपी अक्षय, विनय शर्मा, पवन और मुकेश को ट्रायल कोर्ट ने 10 सितंबर,2013 में फांसी की सजा दी थी। छह महीने बाद हाईकोर्ट ने चारों की फांसी की सजा की पुष्टि कर दी थी।

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