निर्भया कांड: प्रियंका चोपड़ा ने लिखा इमोशनल लेटर, कहा- ‘ये कोई मामूली लड़ाई नहीं, एक क्रांति थी’

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निर्भया को करीब साढ़े चार साल की लड़ाई के बाद शुक्रवार(5 मई) को आखिर न्याय मिल ही गया। इस मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जमकर सराहना की है। साथ ही फैसले को सही बताते हुए प्रियंका ने एक इमोशनल लेटर लिखा है, जो दिल को छू देने वाला है।

फोटो: The Indian Express

प्रियंका ने लिखा है, इस फैसले को आने में भले 5 साल का समय लगा हो, लेकिन आखिर आज सच जीत ही गया। इस फैसले से सभी को सीख मिलेगी। मुझे अपने देश की कानून व्यवस्था पर फक्र महसूस हो रहा है। पिछले पांच सालों से पूरा देश इस फैसले की मांग कर रहा था। सभी यही चाहते थे कि उन चारों दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले।’

उन्होंने आगे लिखा है, ये कोई मामूली लड़ाई नहीं थी। ये एक ऐसी क्रांति थी जिसने पूरे भारत को हिला दिया था। इस क्रांति में भारत का हर तबका चाहे वह घरेलु महिला हो, छात्र हो, हर कोई इसमें शामिल था।

प्रियंका ने आगे लिखा है, आज से 5 साल पहले शुरु हुई इस लड़ाई का फैसला आज हुआ है। यह एक ऐसी लड़ाई थी, जिससे हर इंसान ने अपने तरफ से लड़ा। निर्भया को हम लोग कभी भूल नहीं पाएंगे। यह लड़ाई किसी एक की नहीं थी, बल्कि ये समाज के हर तपके की थी, हर वो लड़की की थी।’

प्रियंका चोपड़ा लेटर के अलावा ट्वीटर के जरिए कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इनमें से दो किस्से ऐसे हैं जो पढ़कर आपकी आंखें भर आएंगी। बता दें कि दिल्ली सहित देश को झकझोर कर रख देने वाले 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चारों आरोपियों को फांसी की सजा बरकरार रखी। अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने माना कि निर्भया के दोषी जीने लायक नहीं हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि इस अपराध ने देश में चारों ओर सदमे की सुनामी पैदा कर दी थी। यह जघन्य से जघन्यतम श्रेणी का जुर्म है, जिसमें बहुत ही निर्दयता और बर्बरता के साथ 23 वर्षीय असहाय छात्र पर बेहद क्रूर यौन हमला किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि यह समाज के मानस को झकझोर देने वाला अपराध है। इसमें सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा ही दी जा सकती है, और कुछ नहीं। बता दें कि निचली अदालत से सजा पाए गए चारों दोषियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने भी चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद फिर आरोपियों ने हाई कोर्ट ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

जानें, निर्भया मामले में कब क्या हुआ?

  • 16 दिसंबर, 2012: दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में 6 लोगों ने पैरामेडिकल छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया। घटना के बाद युवती और उसके दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया गया।
  • 18 दिसंबर, 2012: आरोपी राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को इस मामले में गिरफ्तार किया गया।
  • 21 दिसंबर, 2012: इस मामले में एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे अभियुक्त अक्षय ठाकुर को बिहार से पकड़ा गया।
  • 29 दिसंबर, 2012: 13 दिन संघर्ष करने के बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता ने दम तोड़ दिया।
  • 03 जनवरी, 2013: पुलिस ने पांच बालिग अभियुक्तों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती आदि आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल की।
  • 17 जनवरी, 2013: इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांचों अभियुक्तों पर आरोप तय किए।
  • 11 मार्च, 2013: निर्भया कांड के मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर खुदकुशी कर ली।
  • 31 अक्टूबर, 2013: जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को गैंगरेप और हत्या का दोषी माना और उसे बाल सुधार गृह में तीन साल गुजारने का फैसला सुनाया। जो 20 दिसंबर 2015 को रिहा गया।
  • 10 सितंबर, 2013: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चारों आरोपियों को 13 अपराधों के लिए दोषी ठहराया।
  • 13 सितंबर, 2013: तीन दिन बाद अदालत ने चारो आरोपी मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई।
  • 07 अक्टूबर, 2013: निचली अदालत से सजा पाए चार दोषियों में से विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की।
  • 13 मार्च, 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा।
  • 02 जून, 2014: दो आरोपियों ने हाई कोर्ट ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
  • 27 मार्च, 2017: सुप्रीम कोर्ट में सुनावाई पूरी, शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा पर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 5 मई, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा।

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