निर्भया कांड: बलात्कारियों को होगी फांसी, जानें- 2012 से लेकर आज तक, कब-कब क्या हुआ?

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सहित देश भर को हिला देने वाले 16 दिसंबर 2012 के दिल्ली गैंगरेप और हत्याकांड मामले में चारों दोषियों की दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (5 मई) का यह अहम फैसला सुनाया। फैसला सुनकर निर्भया की मां की आंखों में आंसू आ गए। इससे पहले, अदालत ने 27 मार्च को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

फाइल फोटो: साभार

सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को फांसी देने के ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए चारों दोषियों- मुकेश, पवन, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह की अपील को खारिज करते हुए फांसी की सजा बरकार रखा। जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने कहा कि निर्भया कांड एक घिनौनी करतूत थी, जिस बर्बरतापूर्ण तरीके से घटना को अंजाम दिया गया, उस लिहाज से हाईकोर्ट का फैसला सही था। इस बर्बरता के लिए रहम की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने कहा कि इस घटना की वजह से देश में सदमे की सूनामी आ गई थी। अगर किसी एक मामले में मौत की सजा हो सकती है तो वो यही है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि दोषियों ने पीडि़त की अस्मिता लूटने के इरादे से उसे सिर्फ मनोरंजन का साधन समझा। दोषी अपराध के प्रति आसक्त थे। कोर्ट ने कहा कि जैसे अपराध हुआ, ऐसा लगता है कि यह किसी अलग दुनिया की कहानी है।इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने एक संदेश देने की कोशिश की है कि इस तरह के बर्बरतापूर्ण अपराध के लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं है।

शीर्ष अदालत ने माना कि दोषियों को पता है कि उन्होंने कितनी वहशियाना हरकत की है। कोर्ट ने जैसे ही फांसी का फैसला सुनाया तो निर्भया के मां-बाप और वहां मौजूद अन्य लोगों ने कोर्ट में फैसले के समर्थन मे तालियां बजाई। कुछ ने धीमी आवाज मे शेम शेम भी कहा।

दिल्ली पुलिस ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने कहा था कि गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि के होने और युवा होने की वजह से नरमी बरती जानी चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह की है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि साल 2012 में 16 दिसंबर की रात को 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में जघन्य तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उसे उसके एक दोस्त के साथ बस से बाहर फेंक दिया गया था। उसी साल 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में लड़की की मौत हो गई थी।

पुलिस ने वारदात में शामिल बस चालक रामसिंह, परिचालक मुकेश कुमार व अक्षय कुमार उर्फ अक्षय ठाकुर, उनके साथियों पवन कुमार और विनय शर्मा को गिरफ्तार किया था। मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को भी गिरफ्तार किया था।

निचली अदालत ने नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया था, जबकि बाकी सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। देशभर को दहला देने वाली इस वारदात के बाद मुख्य आरोपी ड्राइवर राम सिंह ने तिहाड़ जेल में 11 मार्च 2013 को कथित खुदकुशी कर ली थी, जबकि नाबालिग अपनी तीन साल की सुधारगृह की सजा पूरी कर रिहा हो चुका है।

जानें, निर्भया मामले में कब क्या हुआ?

  • 16 दिसंबर, 2012: दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में 6 लोगों ने पैरामेडिकल छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया। घटना के बाद युवती और उसके दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया गया।
  • 18 दिसंबर, 2012: आरोपी राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को इस मामले में गिरफ्तार किया गया।
  • 21 दिसंबर, 2012: इस मामले में एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे अभियुक्त अक्षय ठाकुर को बिहार से पकड़ा गया।
  • 29 दिसंबर, 2012: 13 दिन संघर्ष करने के बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता ने दम तोड़ दिया।
  • 03 जनवरी, 2013: पुलिस ने पांच बालिग अभियुक्तों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती आदि आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल की।
  • 17 जनवरी, 2013: इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांचों अभियुक्तों पर आरोप तय किए।
  • 11 मार्च, 2013: निर्भया कांड के मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर खुदकुशी कर ली।
  • 31 अक्टूबर, 2013: जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को गैंगरेप और हत्या का दोषी माना और उसे बाल सुधार गृह में तीन साल गुजारने का फैसला सुनाया। जो 20 दिसंबर 2015 को रिहा गया।
  • 10 सितंबर, 2013: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चारों आरोपियों को 13 अपराधों के लिए दोषी ठहराया।
  • 13 सितंबर, 2013: तीन दिन बाद अदालत ने चारो आरोपी मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई।
  • 07 अक्टूबर, 2013: निचली अदालत से सजा पाए चार दोषियों में से विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की।
  • 13 मार्च, 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा।
  • 02 जून, 2014: दो आरोपियों ने हाई कोर्ट ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
  • 27 मार्च, 2017: सुप्रीम कोर्ट में सुनावाई पूरी, शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा पर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 5 मई, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा।

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