प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुला पत्र- मोदी जी घर मे पल रहे आतंकियों पर कब काबू पाओगे?

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आदरणीय मोदी जी,
नमस्कार

हो सकता है की आपको इस पत्र से आश्चर्य हो, लेकिन इसका कोई इलाज नही। क्योकि आपने संवाद के दोनो तरफ के रास्ते कब का बंद कर चूके है। आपके ‘मन की बात’ एक तरफा होती है। पिछले साढ़े तीन सालों में आपने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नही की है। आप सिर्फ अपनी सहूलियत वाले पत्रकारों से ही बातचीत करते है। लिहाजा मजबूरी मे यह खुला पत्र आप को लिख रहा हूँ।

मोदी
file photo

मोदी जी, जब आप दावोस के बर्फीले मौसम का लुत्फ़ उठा रहे थे तब यहा भारत मे हिंसा का लावा बह रहा था। आप को इसकी जानकारी अवश्य रही होगी। ‘पद्मावत’ सिनेमा को लेकर करणी सेना ने आप के गुजरात मे उत्पात की शुरुआत की। बाद मे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश मे भी यह हिंसा फैल गया। कहर तो तब हुआ जब इन्हीं आतंकवादियों ने गुरुग्राम मे स्कूली बच्चों के बस पर हमला कर किया। सिर्फ तकदीर अच्छी थी इसलिए बच्चों को कोई चोट नही लगी, वरना काफी गंभीर समस्या खड़ी हो सकती थी।

मोदी जी, आपकी आपकी सरकारों के सुरक्षा तंत्र तथा संबंधित राज्यों की पुलिस इन ‘पद्मावत’ आतंकियों को काबू में नहीं ला सकी, इस बात पर कोई कैसे विश्वास करे? जिन राज्यों मे हिंसा की वारदाते हुई वे सभी बीजेपी के शासन मे है। आपकी पार्टी के कई नेता, लोक-प्रतिनिधी, कार्यकर्ता करणी वादी बनकर इस हिंसा मे शामिल हुए है। आप और आप के मुख्यमंत्री इन्हें रोकने में असफल साबित हुए है, इस बात पर विश्वास करना कठिन है। या फिर आप को ही यह हिंसा रोकने मे कोई दिलचस्पी नही है? इससे अगर वोटों का ध्रुवीकरण हुवा तो उसका फायदा आने वाले चुनावों मे हो सकता है, आपकी और कांग्रेस की चुप्पी के पीछे यही कारण तो नहीं है ?

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अगर यह सच है, तो देश की शांतिप्रिय जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी। अपने बच्चों पर जान की आफत आने पर कौन मां-बाप शांत बैठ सकता है? दूसरी तरफ इस हिंसा के कारण दावोस मे दिए आपके भाषण पर भी पानी फिर गया है। देश मे ऐसे हालात होते हुए कौन सा पूंजीवादी अपना पैसा यहा लगाने की हिम्मत करेगा?

मोदी जी, सवाल सिर्फ ‘पद्मावत’ का नही है बल्की इस देश की संविधाना का भी है। मान लेते है कि यह फिल्म एक दम बकवास है, लेकिन उसे बनाने का अधिकार निर्माता और निर्देशक को हो होना ही चाहिए जरूरी। इस फिल्म को सुप्रीम कोर्ट ने भी हरी झंडी दी थी। इसलिए इस फिल्म को संरक्षण देना सरकार का कर्तव्य था, लेकिन आपकी सरकार ने उसका पालन नही किया और आपने भी इस के खिलाफ कोई बात नही की। लिहाज़ा आपकी नियत पर संदेह लाज़मी है। देश का प्रधानमंत्री इस मुलभूत अधिकार के पक्ष मे खड़ा नही होगा तो जनता किस की तरफ देखे?

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मोदी जी, मुझे पता है की आप जरूर पुछेंगे कि पिछले 70 सालों मे कांग्रेस ने क्या किया? आपका सवाल वाजिब भी है, लेकीन कांग्रेस से नाराज़गी की वजह से ही जनता ने आपको चुना है। कांग्रेस ने संविधान को कई बार तोड़ा-मरोड़ा है, इस देश पर आपातकाल थोप दिया, हर प्रकार की स्वतंत्रता का गला दबाया है। सलमान रुश्दी से लेकर जेम्स लेन की किताबों को बैन करने की ग़लतियाँ भी की और आज भी उन्हे वास्तविकता का पता नही है।

उनके दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता करणी सेना को समर्थन दे रहे है पर मोदी जी आप प्रधानमंत्री है, वो नही और यही सबसे बड़ा फर्क है। प्रधानमंत्री बनने पर आपने संसद की सीढ़ियों पर सिर रखकर प्रणाम किया था। वह एक प्रकार से संविधान को प्रणाम था, क्या यह बात आप भूल गए है? या फिर वो एक नाटक था? आपने तसलीमा नसरीन को जिस सम्मान के साथ भारत मे आश्रय दीया था उसी निष्पक्षता के साथ अब आप बर्ताव क्यो नही कर रहे है?

माननीय मोदी जी, करणी सेना की हिंसा से आपकी सरकार पर कलंक लगा है। पर यह पहला कलंक नही है। आप के सत्ता मे आने के बाद सबसे पहले मोहसिन शेख की हत्या हुई, फिर अखलाक, जुनैद….कितने नाम ले? यह सब गौ-आतंकवादी आपके ही परिवार के थे। आगे चलकर दलितों पर हमलों की कतार लगी। रोहित वेमुला की बली चढ़ी।

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अल्पसंख्यकों को सबक सीखाने का एक भी मौका आपके भगवे गुंडों ने नहीं छोड़ा। विद्यार्थी नेताओं को देशद्रोही करार देने मे आपके भाइयों ने कोई कमी नही छोडी। ऐसी परिस्थिति मे आप संविधान मे विश्वास रखते है इस बात को कैसे मान ले? या फिर यह हिंदू राष्ट्र की तैयारी है? इसका जबाब आपको देना होगा क्योकि आप सब का साथ “सबका विकास विकास” का दावा करते हुए सत्ता मे आए है। और आज भी ये दावा करते थकते नहीं हैं।

मोदी जी, अगर आप चाहे तो यह बवाल रोक सकते है। ब्रिटिश सरकार ने जिस प्रकार सलमान रुश्दी को संरक्षण दिया, महाराष्ट्र मे अशोक चव्हाण की सरकार ने शाहरुख खान की फिल्म माई नाम इज़ खान को जिस प्रकार सुरक्षा मुहैया कराई, उसी प्रकार का विश्वास आप यहा के लेखक-कलाकार, जनता को दे सकते है। सवाल सिर्फ मन में इच्छा का है। आज तक वो आपने कभी नहीं दिखाई, पर अब भी समय है। आप अपनी गलती सुधार सकते हो। कल गणतंत्र दिवस गुज़रा है। आप फिर से संविधान की शपथ मन से लिजिए। वरना इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगा।

आज के लिए इतना ही काफी है। बाकी की बातें फिर कभी होगी।
आपका,
संविधान पर श्रद्धा रखने वाला एक नागरिक,

निखिल वागले

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