मध्यप्रदेश: किसानों के कपड़े उतरवाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव और DGP से मांगा जवाब

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मंगलवार(3 अक्टूबर) को बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए किसानों ने कांग्रेस के साथ आंदोलन किया था। आंदोलन कर रहें किसानों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उन्हें थाने में ले जाकर कपड़े उतार कर पीटा था। अब इस मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है।

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समाचार एंजेसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। आयोग ने कहा है कि मीडिया में टिकमगढ़ में किसानों के उत्पीड़न को लेकर जो रिपोर्ट आईं हैं अगर वे सही हैं तो यह किसानों के मानवाधिकारों का हनन है। लिहाजा, राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक चार सप्ताह में इस मामले की रिपोर्ट पेश करें।

ख़बरों के मुताबिक, आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के गृहमंत्री ने तीन दिन में जांच कराने के निर्देश दिए हैं, मगर उन्होंने यह नहीं माना है कि पुलिस थाने में किसी की पिटाई हुई है।

गौरतलब है कि, मंगलवार(3 अक्टूबर) को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए किसानों ने कांग्रेस के साथ आंदोलन किया था। इस दौरान कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की मांग कर रहे किसानों की पुलिस से झड़प हो गई। देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई और पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर आंसू गैस के गोले छोड़े।

बताया जा रहा है कि कुछ देर बाद आंदोलन से वापस लौट रहे किसानों से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉली पुलिस ने रोक लीं उन्हें देहात थाने ले गए। दुनातर से आए एक किसान ने बताया था कि हम लोग प्रदर्शन से गांव लौट रहे थे, तभी पुलिस ने रोक लिया और थाने ले जाकर पीटा।

बता दें कि, पिछले दिनों मंदसौर जिले में आंदोलन कर रहे किसानों पर हुई फायरिंग में करीब 6 की मौत हो गई थी। जिसके बाद मंदसौर-नीमच रोड पर पिपल्यामंडी इलाके में उग्र किसानों ने 8 ट्रकों और 2 बाइकों को आग लगा दी थी।

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