जेटली VS मनमोहन: वित्त मंत्री ने नोटबंदी को बताया ऐतिहासिक, कहा- आने वाली पीढ़ियां गर्व करेंगी

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कल यानी 8 नवंबर (बुधवार) को नोटबंदी को एक साल पूरे हो जाएंगे। इस पर देश की दोनों बड़ी पार्टियों के बीच सियासी तनातनी भी शुरू हो गई है। गुजरात चुनाव प्रचार के लिए अहमदाबाद गए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार (7 नवंबर) को नोटबंदी को सरकार की सबसे बड़ी भूल बताते हुए दोहराया कि यह एक संगठित लूट थी। मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि मैंने जो संसद में कहा था, उसे दोहराता हूं। यह एक संगठित और वैधानिक लूट थी।वहीं, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के फैसले की घोषणा के दिन 8 नवंबर 2016 को भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास का ऐतिहासिक क्षण करार दिया। नोटबंदी को भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए  जेटली ने मंगलवार (7 नवंबर) को कहा कि नोटबंदी ने देश में स्वच्छ, पारदर्शितापूर्ण और ईमानदार वित्तीय प्रणाली प्रदान की है जिस पर आने वाली पीढ़ी गर्व करेगी।

‘‘नोटबंदी के एक वर्ष’’ शीर्षक से अपने लेख में जेटली ने कहा कि आठ नवंबर को भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में महत्वपूर्ण क्षणों के रूप में याद किया जाएगा। यह दिवस देश से कालाधन की गंभीर बीमारी के उपचार के इस सरकार के संकल्प को प्रदर्शित करता है। हम भारतीयों को भ्रष्टाचार और कालाधन के संदर्भ में ‘‘चलता है’’ की भावना के साथ रहने को मजबूर कर दिया गया था और इस व्यवहार का प्रभाव मध्यम वर्ग और समाज के निचले तबके के लोगों को भुगतना पड़ रहा था।उन्होंने कहा कि समाज के एक बड़े तबके के भीतर लंबे समय से यह तीव्र इच्छा थी कि हमारे समाज को भ्रष्टाचार और कालाधन के अभिशाप से मुक्त किया जाए। और इसी इच्छा के परिणामस्वरूप लोगों ने मई 2014 में जनादेश दिया।जेटली ने अपने लेख में लिखा कि मई 2014 में सत्ता संभालने के बाद इस सरकार ने कालाधन की बुराई से निपटने की लोगों की इच्छा को पूरा करने का निर्णय किया और कालाधन के मामले पर एसआईटी का गठन किया।

हमारा देश इस बात से वाकिफ है कि किस प्रकार पूर्व की सरकार ने वर्षो तक उच्चतम न्यायालय के निर्देश को नजरंदाज किया था। उस समय की सरकार की कालाधन के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में इच्छा शक्ति की कमी का एक और उदाहरण 28 वर्षो तक बेनामी संपत्ति अधिनियम को लागू करने में देरी करना था।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस सरकार ने निर्णय किया और कालाधन के खिलाफ लड़ाई के उद्देश्यों को पूरा करने के लिये तीन वर्षो में सुविचारित और सुनियोजित तरीके से निर्णय किया और कानून के पूर्व के प्रावधानों को लागू किया। एसआईटी के गठन से विदेशी संपत्ति के संदर्भ में जरूरी कानून पारित कराने से लेकर नोटबंदी और जीएसटी को लागू करने का निर्णय इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

उन्होंने कहा कि जब देश ‘कालाधन विरोधी दिवस’ मना रहा है, तब एक बहस शुरू हो गई है कि क्या नोटबंदी की कवायद अपने उद्देश्यों को पूरा कर सकी। इस संदर्भ में नोटबंदी अल्पावधि और मध्यावधि में तय उद्देश्यों के संदर्भ में सकारात्मक परिणाम लाने वाला कदम रहा।

जेटली ने कहा कि संपूर्ण रूप से यह कहना गलत नहीं होगा कि नोटबंदी से देश स्वच्छ, पारदर्शितापूर्ण और ईमानदार वित्तीय प्रणाली की ओर बढ़ा है। कुछ लोगों को अभी तक इसके फायदे नहीं दिखे हैं। आने वाली पीढ़ी नवंबर 2016 के बाद के राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गर्व की भावना के साथ देखेगी, क्योंकि इसने उन्हें निष्पक्ष एवं ईमानदार व्यवस्था रहने के लिये प्रदान की है।

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