PM मोदी ने दिया संकेत- लोकलुभावन नहीं होगा बजट, सुप्रीम कोर्ट के जजों के विवाद पर भी पहली बार की टिप्पणी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (21 जनवरी) को संकेत दिया कि आगामी बजट लोकलुभावन नहीं होगा। साथ ही कहा कि यह मुद्दा वित्त मंत्री अरुण जेटली के अधिकार क्षेत्र में आता है और वह इसमें दखल नहीं देना चाहते। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक मिथक है कि आम आदमी सरकार से मुफ्त की चीजों की आस रखता है। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार सुधार के एजेंडे पर चलती रहेगी, क्योंकि इसी वजह से भारत दुनिया की ‘पांच सबसे दुर्बल’ अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से बाहर आ सका है।

(Photo: Twitter/Times Now)

अंग्रेजी समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘यह मात्र एक धारणा है कि लोग मुफ्त की चीजें और छूट चाहते हैं। यह पूछे जाने पर कि पहली फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट में क्या वह लोकलुभावन घोषणा करने से बचेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि तय यह करना है कि देश को आगे बढ़ने और मजबूत होने की जरूरत है या इसे ‘इस राजनैतिक संस्कृति-कांग्रेस की संस्कृति का अनुसरण करना है।’

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, पीएम मोदी ने कहा कि आम जनता ईमानदार सरकार चाहती है। ‘आम आदमी छूट या मुफ्त की चीज नहीं चाहता है… यह (मुफ्त की चीज की चाहत) आपकी कोरी कल्पना है।’ उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के फैसले जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हैं। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान अपनी सरकार की आर्थिक नीतियों का जोरदार बचाव किया।

जीएसटी के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार माल एवं सेवा कर में संसोधन के सुझाव पर अमल के लिए तैयार है ताकि इसे अधिक कारगर प्रणाली बनाया जा सके और इसकी खामियां दूर हो। स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की शिखर बैठक के पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करने का अवसर पाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री का सम्मान पाने के बारे में पूछे जाने पर मोदी ने कहा कि यह भारत की प्रगति के कारण संभव हुआ है।

उन्होंने कहा कि, ‘भारत ने दुनिया को अपनी शक्ति का परिचय दिया है इसलिए यह स्वाभाविक है कि दुनिया भी भारत के बारे में जानना चाहती है और वह यह जानकारी भारत से (भारत के शासनाध्यक्ष से) सीधे प्राप्त करना चाहती है और उसे समझना चाहती है।’ मोदी ने कहा कि स्वच्छ और स्पष्ट नीतियों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है और उद्यमी (निवेश का) जोखिम उठाने लगे हैं। भारत बड़े आर्थिक अवसरों का देश और वैश्विक निवेश का आकर्षक गंतव्य बन गया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी सरकार 2019 के आम चुनाव से पहले किए जा रहे अंतिम पूर्ण बजट को लोकलुभावन बजट बनाएगी तो उन्होंने कहा कि यह मामला वित्त मंत्री के दायरे में आता है और वह (मोदी) इस काम में हस्ताक्षेप नहीं करना चाहते। साथ ही उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों ने मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में देखा है वे जानते हैं कि सामान्य जन इस तरह की चीजों (लोकलुभावन) की अपेक्षा नहीं करता। यह एक मिथक (कोरी कल्पना) है।’

‘राजनीतिक पार्टियों को न्यायपालिका के मौजूदा संकट से दूर रहना चाहिए’

वहीं, न्यापालिका संकट पर अपनी पहली टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार और राजनीतिक पार्टियों को अवश्य ही इससे दूर रहना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायपालिका अपनी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए एक साथ बैठेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय न्यायपालिका का एक उत्कृष्ट इतिहास रहा है और यह बहुत सक्षम लोगों से परिपूर्ण है।

उन्होंने टाइम्स नाऊ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि, ‘‘हमारे देश की न्यायपालिका का एक बहुत ही उत्कृष्ट अतीत रहा है, वे बहुत ही सक्षम लोग हैं। वे एक साथ बैठेंगे और अपनी समस्याओं का समाधान निकालेंगे। हमारी न्यायिक प्रणाली में मेरी आस्था है, वे निश्चित तौर पर एक समाधान निकालेंगे।’’

Rifat Jawaid on Office of Profit controversy

Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, 20 January 2018

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा संवेदनशील मामलों के आवंटन की उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा सार्वजनिक तौर पर आलोचना किए जाने के बाद शीर्ष न्यायालय में उत्पन्न संकट के बारे में पूछे जाने पर मोदी ने कहा कि, ‘‘मुझे लगता है कि मुझे इस चर्चा से दूर रहना चाहिए। सरकार को भी इससे अवश्य दूर रहना चाहिए। राजनीतिक दलों को भी इससे अवश्य दूर रहना चाहिए।’’

उनके गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्हें निशाना बनाए जाने की तरह ही भाजपा के हाई प्रोफाइल नेताओं को संकट में डालने की विपक्षी दलों की कथित कोशिशों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन लोगों ने उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करने की कई कोशिशें की थी।

गौरतलब है कि 12 जनवरी को शीर्ष न्यायालय के चार शीर्ष न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ- ने एक असाधारण घटनाक्रम के तहत संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि उच्चतम न्यायालय में ‘सब कुछ ठीक ठाक नहीं’ है। उन्होंने खुद के द्वारा जताई गई चिंताओं को नजरअंदाज करने को लेकर सीजेआई दीपक मिश्रा की तीखी आलोचना की थी।

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