तो इसलिए, सुहागरात के दिन नव वर-वधू के कमरे को फूलों से सजाया जाता है!

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सुहागरात के पीछे कई रीति-रिवाज हैं, जिसे शायद आप नही जानते होंगे। भारतीय संस्कृति में विवाह परंपरा को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। कहा जाता है कि, विवाह दो आत्माओं का मिलन का उत्सव है और सुहागरात की रात इस उत्सव की गवाह।

इस रात में सोने से पहले नवविवाहिता स्त्री पारंपरिक रूप से बादाम, केसर और काली मिर्च के मिश्रण से दूध तैयार करती है। यह दूध वह अपने पति को देती है, दूध कामेच्छा को बढ़ाता है। कामसूत्र में दूध के साथ सौंफ का रस, शहद, चीनी के पेय के बारे में उल्लेख मिलता है।

इस ग्रंथ में दूल्हे और दुल्हन को दूध में केसर, सौंफ का रस देने का रिवाज है।हिंदू धर्म में भी इस तरह की मान्यताएं सदियों से चली आ रही हैं, सुहागरात के दिन दूध पीना वैज्ञानिक रूप से भी बेहतर माना गया है।

लेकिन विवाह के बाद पहली रात यानी सुहागरात के पीछे कई रीति-रिवाज हैं, इनमे से एक हैं शयन कक्ष को फूलों से सजाना। सुहागरात को नव वर-वधू के कमरे को फूलों से सजाया जाता है, यह एक पुरानी परंपरा है।

मान्यता है कि इस दिन से लोग अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं, इसलिए शयन कक्ष का माहौल रोमांटिक बनाया जाता है। इस दिन शयन कक्ष को सुगंधित फूल रजनीगंधा, गुलाब, चमेली या फिर कामेच्छा बढ़ाने वाले मादक फूलों से शयन कक्ष को सजाया जाता है।

एक सर्वे के मुताबिक, ब्रिटेन में औसतन 23 फीसद जोड़े शादी के बाद सुहागरात में सेक्‍स नहीं कर पाते हैं। वे शादी वाले दिन सेक्‍स करने के बजाए अन्‍य किसी दिनों में सेक्‍स करने की ज्‍यादा इच्‍छा रखते हैं। 711 विवाहित जोड़ों के बीच में कराए गए सर्वे में सामने आई है कि, ब्रिटेन के हर तीन में से एक नवविवाहित जोड़ा अपनी शादी की रात यानि सुहागरात को चरम सुख नहीं प्राप्‍त कर पाता है।

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