अपना बकाया वसूलने के लिए कतार में खड़े लेनदार कंपनियों ने बढ़ाई अनिल अंबानी की मुश्किलें, जेल जाने का खतरा!

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राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कर्ज में डूबी उद्योगपति अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के प्रमुख कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत अन्य वित्तीय संस्थानों की सोमवार (11 मार्च) को खिंचाई की। न्यायाधिकरण ने कहा कि बैंकों ने दूरसंचार कंपनी की संपत्ति रिलायंस जियो को बेचकर 37,000 करोड़ रुपये प्राप्त होने को लेकर गलत एहसास दिलाया।

चेयरमैन न्यायाधीश एस जे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने रिलायंस कम्युनिकेशन को कर्ज दे रखे बैंकों खासकर एसबीआई को फटकार लगाई और यह पूछा कि इसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘आपने जो बातें कही, उसे पूरा करने में विफल रहे। संयुक्त कर्जदाता समूह विफल रहा है। कोई बिक्री नहीं हुई।’’

पीठ के अनुसार, कर्जदाताओं ने संपत्ति बिक्री के जरिए करीब 37,000 करोड़ रुपये की वसूली को लेकर एनसीएलएटी को ‘सब्जबाग’ दिखाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। एनसीएलटी ने कहा, ‘‘आपने आरकॉम के साथ बैठकर तालियां बजाई और दावा किया कि आप रिलायंस जियो को संपत्ति बेचकर करीब 37,000 करोड़ रुपये जुटा लेंगे…पहले आपने प्रतिदिन करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही थी।’’

न्यायाधिकरण ने कहा कि संपत्ति बिक्री से राशि प्राप्त करने में विफल रहने के बाद कर्जदाता अब कंपनी को आयकर रिफंड से प्राप्त 260 करोड़ रुपये की वसूली में लगे हैं। एनसीएलएटी आर कॉम की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उस पर चार फरवरी को लगाई गई रोक को हटाने का आग्रह किया गया है। हालांकि, उसके कर्जदाता एरिक्सन को 550 करोड़ रुपये देने के लिये आयकर रिफंड जारी करने की अर्जी का विरोध कर रहे हैं।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने कर्जदाताओं से पूछा कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत क्यों नहीं आयकर रिफंड जारी करने के निर्देश दिए जाने चाहिए। एनसीएलएटी ने सभी कर्जदाताओं से इस बारे में दो पृष्ठ का जवाब देने को कहा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एरिक्सन का बकाया भुगतान करने के लिए आरकॉम को दी गई चार हफ्तों की मोहलत में से आधो से अधिक समय बीतने के साथ ही अनिल अंबानी की असल मुश्किलें शुरू हो गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से बचने के लिए आरकॉम के प्रमोटर अनिल अंबानी और उनका ग्रुप एरिक्सन को 453 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के उपाय (संपत्तियों की बिक्री सहित) में लगे हैं, लेकिन आने वाले समय में आरकॉम की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि कई और लेनदार कंपनी और उसके निदेशकों से अपना बकाया वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कतार में खड़े हैं। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

एरिक्सन को भुगतान नहीं करने पर अनिल अंबानी को होगी जेल

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के अध्यक्ष अनिल अंबानी और दो अन्य को जानबूझ कर उसके आदेश का उल्लंघन करने का दोषी ठहराते हुए कहा था कि दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन को 453 करोड़ रुपए की रकम का चार सप्ताह के भीतर भुगतान नहीं करने पर उन्हें तीन महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय ने कहा था कि आरकाम के अध्यक्ष अनिल अंबानी, रिलायंस टेलीकॉम के अध्यक्ष सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल की अध्यक्ष छाया विरानी ने न्यायालय में दिए गए आश्वासनों और इससे जुड़े आदेशों का उल्लंघन किया है।

न्यायालय ने कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशन के अध्यक्ष और अन्य को अवमानना से बचने के लिए एरिक्सन को चार सप्ताह में 453 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। शीर्ष अदालत ने रिलायंस टेलीकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल दोनों को चार सप्ताह में न्यायालय की रजिस्ट्री में एक-एक करोड़ रुपये जमा करने का भी निर्देश दिया और कहा कि ऐसा नहीं होने पर इन कंपनियों के अध्यक्षों को एक एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। पीठ ने निर्देश दिया कि रिलायंस ग्रुप की ओर से न्यायालय की रजिस्ट्री में पहले जमा कराए गये 118 करोड़ रुपये की राशि एक सप्ताह के भीतर एरिक्सन को दे दी जाए।

पीठ ने कहा कि रिलायंस की तीनों कंपनियों ने एरिक्सन को 550 करोड़ रूपए का भुगतान करने के लिये प्रदान की गयी 120 दिन की समय सीमा और 60 दिन की अतिरिक्त अवधि का पालन नहीं किया। फैसला सुनाये जाने के चंद मिनट बाद ही अंबानी की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह शीर्ष अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं और विश्वास है कि समूह एरिक्सन को देय राशि का भुगतान करने संबंधी निर्देशों का सम्मान करेगा।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, शीर्ष अदालत ने एरिक्सन इंडिया की याचिका पर 13 फरवरी को सुनवाई पूरी की थी। एरिक्तसन का आरोप था कि रिलायंस समूह के पास राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में निवेश के लिए धन है, परंतु वह उसकी बकाया 550 करोड़ रूपए की रकम का भुगतान करने में असमर्थ है। अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने इस आरोप का पुरजोर विरोध किया था। अंबानी ने न्यायालय को बताया कि अपनी संपत्ति बेचने के बारे में बड़े भाई मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो के साथ बातचीत विफल हो जाने की वजह से उनकी कंपनी ने दिवालिया कार्यवाही का सहारा लिया है और धन उसके नियंत्रण में नहीं है।

आरकाम ने न्यायालय से कहा कि उसने एरिक्सन की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए जमीं-आसमां एक कर दिया परंतु जियो के साथ संपत्ति बिक्री की बातचीत विफल होने की वजह से वह इसका भुगतान करने में असमर्थ हो गयी। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 23 अक्टूबर को आरकाम को 15 दिसंबर, 2018 तक एरिक्सन की बकाया राशि का भुगतान करने के लिये अंतिम अवसर दिया था और कहा था कि इसमें किसी भी प्रकार का विलंब होने पर उसे 12 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।

 

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