आतंक की राह छोड़ सैनिक बने लांस नायक नजीर अहमद वानी मरणोपरांत अशोक्र चक्र से सम्मानित, पत्नी और मां ने किया ग्रहण

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जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में पिछले वर्ष नवंबर में आतंकवादियों से लोहा लेते वक्त जान कुर्बान करने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार (26 जनवरी) को अशोक चक्र से सम्मानित किया। लांस नायक की पत्नी और मां ने गणतंत्र दिवस समारोह में यह सम्मान ग्रहण किया। बता दें कि शुरू में आतंकी रहे वानी बाद में हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट आए थे और वह 2004 में सेना में शामिल हुए थे।

Photo: PIB

70वें गणतंत्र दिवस पर, वानी की मां के साथ उनकी पत्नी महजबीन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अशोक चक्र पुरस्कार ग्रहण किया। पुरस्कार ग्रहण करते समय दो बच्चों की मां और शिक्षिका महजबीन की आंखें अश्रुपूरित थीं। जम्मू एवं कश्मीर के कुलगाम जिले के चेकी अश्मूजी के निवासी वानी के परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं।

बता दें कि अशोक चक्र शांतिकाल में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। वानी अशोक चक्र पाने वाले पहले कश्मीरी हैं। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में चेकी अश्मुजी के रहने वाले वानी आतंकवाद का रास्ता छोड़कर 2004 में भारतीय सेना की 162 इंफेंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) से जुड़े थे। 38 वर्षीय वानी कुलगाम के अश्मुजी के रहने वाले थे।

वानी ने जम्मू एवं कश्मीर में शहीद होने से पहले दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया था। उन्हें 2007 और 2018 में दो बार वीरता के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया। उन्हें 2018 सेना मेडल एक आतंकवादी को बहुत करीब से मारने के लिए दिया गया था।

शोपियां के बाटगुंड के निकट हीरापुर गांव में आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ में वह 25 नवंबर को शहीद हो गए थे।सम्मान के वक्त प्रशंसात्मक उल्लेख में कहा गया कि वानी ने अभियान में दो आतंकवादियों को मार गिराया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद तीसरे आतंकवादी को घायल कर दिया। इसके अलावा वानी दक्षिण कश्मीर में कई आतंकवाद रोधी अभियानों में शामिल रहे।

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