नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में वीरेन्द्र तावड़े पर लगे आरोपों को बांबे हाईकोर्ट ने किया खारिज

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अंधविश्वास और अघोरी प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की पुणे के महर्षि विट्ठल रामजी ब्रिज पर 20 अगस्त 2013 को दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मुख्य आरोपी वीरेन्द्र तावड़े को आरोप मुक्त कर दिया है। डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में बांबे हाईकोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया गया है जिसमें वीरेन्द्र तावड़े को आरोपी बताया गया था।
नरेंद्र दाभोलकर
जांच में सामने आया कि वारदात से 47 मिनट पहले ही हत्यारे ओंकारेश्वर पुल पर पहुंच चुके थे और महज तीन मिनट में घटना को अंजाम दे फरार हो गए।
हत्यारों का पता लगाने में नाकाम रही पुलिस पर सुराग ढूंढने के लिए तांत्रिक की मदद लेने का आरोप भी लगा। डॉ दाभोलकर की हत्या के बाद पूरे महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे।
मीडिया रिपोट्स के अनुसार, अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने वाले और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में गिरफ्तार डॉ. वीरेंद्र तावड़े को 16 जून तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया था। हिंदू जागरण समिति के कार्यकर्ता तावड़े को भी सीबीआई ने पनवेल से गिरफ्तार किया था।

आपको बता दे कि अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले डॉ नरेंद्र दाभोलकर की पुणे में 20 अगस्त 2013 को दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले पर जमकर राजनीति हुई थी। हत्यारों का पता नहीं लगने के बाद यह केस महाराष्ट्र पुलिस से सीबीआई को सौंपा था। सीबीआई ने इस सिलसिले में पुणे में सारंग अकोलकर के और पनवेल में डॉ वीरेंद्र सिंह तावड़े के घर छापा था।

सीबीआई के सूत्रों ने कहा था कि एजेंसी को दाभोलकर की हत्या के मामले में दोनों की कथित भूमिका को लेकर कुछ साइबर फोरेंसिक सबूत मिले थे जिसके बाद वे जांच के दायरे में आये थे। सूत्रों ने बताया था दाभोलकर हत्याकांड में पिछले दो साल से लगातार चल रही जांच के दौरान एजेंसी को कुछ ईमेल मिले जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।

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